02/10/2026
ससुर के साथ मिलकर कर दिया करनामा/ससुर की हुई मौ*त/
आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है भारत के राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले से। उदयपुर जिले के अंतर्गत 'बेडला' नाम का एक प्रसिद्ध गाँव पड़ता है। इसी बेडला गाँव में रहने वाला मुख्य पात्र है—वेद प्रकाश।
१. जमींदार वेद प्रकाश और उसका परिवार
वेद प्रकाश इस पूरे गाँव का सबसे बड़ा जमींदार माना जाता था। उसके पास अपनी कुल २८ एकड़ उपजाऊ ज़मीन थी। धन, संपत्ति और सामाजिक प्रभाव की वजह से वेद प्रकाश के पास पैसा और पावर दोनों की कोई कमी नहीं थी। परंतु वेद प्रकाश अपने इस धन और बल का हमेशा गलत इस्तेमाल किया करता था।
इन्हीं दुर्गुणों के कारण गाँव के अंदर वेद प्रकाश की ज़रा सी भी इज़्ज़त नहीं थी। गाँव वाले उसका आदर नहीं करते थे, क्योंकि उसका चाल-चलन और चरित्र अत्यधिक खराब था। वेद प्रकाश ने अपने घर के बाहर एक बहुत ही आलीशान और सुसज्जित बैठक बना रखी थी। वह प्रतिदिन रात के समय भारी मात्रा में श/राब पिया करता था। श/राब के न/शे में धुत होने के बाद वह अपनी इस आलीशान बैठक में गाँव की निर्धन व असहाय परिवारों की सुंदर महिलाओं को बुला लिया करता था और उनके साथ अपनी रातें गुज़ारकर अपना बि/स्तर ग/र्म किया करता था। वेद प्रकाश की जीवनशैली का बस यही एक मुख्य काम बन चुका था।
वेद प्रकाश के परिवार में उसका एक बेटा था, जिसका नाम अजय था। इसके अलावा उसकी एक बहू भी थी, जिसका नाम पिंकी देवी था। पिंकी देवी दिन-रात अपने घर के सारे कामकाज में व्यस्त रहती थी। पिंकी देखने में अत्यंत सुंदर, रूपवती और युवा महिला थी। परंतु उसका पति अजय एक न/शे/ड़ी किस्म का व्यक्ति था, जो हर समय तरह-तरह के न/शे में डूबा रहता था। श/रा*ब का अति न/शा करने के बाद अजय अपनी पत्नी पिंकी के साथ छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा और मारपीट किया करता था। पिंकी अपने पति के इस व्यवहार से बहुत दुखी और परेशान आ चुकी थी।
यहाँ तक तो वेद प्रकाश के परिवार में सब कुछ जैसे-तैसे चल रहा था। लेकिन आगे चलकर वेद प्रकाश दो ऐसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाला था, जिसकी गूँज पूरे जिले में सुनाई देने वाली थी।
२. लालच, कर्ज़ और अनैतिक इच्छाएँ
कुछ समय बीत जाने के बाद एक दिन सुबह के लगभग ११:०० बजे का समय था। पिंकी देवी हमेशा की तरह अपने घर के काम-काज निपटा रही थी। उसी समय पिंकी का ससुर वेद प्रकाश खेत से थका-हारा अपने घर लौटता है। घर में प्रवेश करते ही वेद प्रकाश देखता है कि बहू पिंकी के अलावा घर में कोई और मौजूद नहीं है।
पिंकी के रूप, सौंदर्य और उसकी जवानी को देखकर ससुर वेद प्रकाश की नीयत अचानक खराब हो जाती है। वह अपनी बहू को अ/नौ/चि*त नज़रों से देखते हुए कड़क आवाज़ में कहता है, "पिंकी! जल्दी से मेरे लिए खाना लेकर आओ।"
पिंकी बिना कोई देर किए तुरंत रसोई से खाना तैयार करके अपने ससुर के सामने परोस देती है। लेकिन वेद प्रकाश खाना खाने के बजाय पिंकी के शरीर को ऊपर से नीचे तक घूरता रहता है। उसी समय पिंकी अपने ससुर से कहती है, "पिताजी, मुझे आज ३,००० रुपये की सख्त ज़रूरत है। मुझे अपने लिए कुछ कपड़े खरीदने हैं और अजय के लिए भी कपड़े लेने हैं, उनके कपड़े काफी पुराने हो चुके हैं।"
यह सुनते ही वेद प्रकाश तुरंत रुखाई से जवाब देता है, "तुम दोनों के लिए मेरे पास एक भी रुपया नहीं है। अगर मेरे पास पैसे होते भी, तब भी मैं तुम्हें एक फूटी कौड़ी नहीं देता!"
ससुर के ऐसे कड़वे शब्द सुनकर पिंकी काफी परेशान और उदास हो जाती है। वह चुपचाप ससुर को खाना देकर रसोई के भीतर चली जाती है। वेद प्रकाश बैठकर खाना खा ही रहा होता है कि तभी गाँव की एक पड़ोसन महिला, जिसका नाम रजनी देवी था, उसके घर में प्रवेश करती है।
रजनी देवी जैसे ही घर के अंदर आती है, वेद प्रकाश की नज़रें उसके गोरे और सुंदर बदन पर टिक जाती हैं। रजनी देवी एक ऐसी महिला थी जिसका चाल-चलन गाँव में ठीक नहीं माना जाता था। वह गाँव के अमीर लोगों को अपने प्रेम-जाल में फँसाकर उनके साथ अ/नै/तिक सं/बंध बनाती और उनसे मोटी रकम वसूल कर लिया करती थी। आज भी रजनी देवी वेद प्रकाश पर अपने डोरे डालने के इरादे से आई थी।
वेद प्रकाश भी इस खेल में पीछे रहने वाला नहीं था। उसने रजनी की सुंदरता को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "रजनी! आओ मेरे पास बैठो, मैं तुम्हें खाना खिलाता हूँ।"
परंतु रजनी देवी बोली, "जमींदार साहब! मैं यहाँ खाना खाने नहीं आई हूँ। मुझे अचानक ५,००० रुपये की सख्त ज़रूरत आ पड़ी है। आप मुझे ५,००० रुपये कर्ज़ के तौर पर दे दीजिए, मैं अगले महीने ब्याज सहित लौटा दूँगी।"
वेद प्रकाश ने हँसते हुए कहा, "रजनी! तुम्हें पैसों की चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। अगर तुम्हें ५,००० रुपये चाहिए तो तुम्हें मेरे साथ कमरे में चलना होगा।"
रजनी भी चालाक थी, वह मुस्कुराकर बोली, "जमींदार साहब, आप जहाँ कहेंगे मैं चलने को तैयार हूँ।"
इसके बाद वेद प्रकाश रजनी देवी को अपने कमरे के अंदर ले जाता है। कमरे में पहुँचते ही वह रजनी से कहता है, "देखो रजनी, मैं रात के समय अपनी अलग बैठक में सोता हूँ। वहाँ रात में कोई नहीं आता। मैं तुम्हें अभी के अभी ५,००० रुपये दे देता हूँ, लेकिन शर्त यह है कि आज रात १०:०० बजे तुम्हें मेरी बैठक में आना होगा और मेरा बि/स्तर ग/र्म करना होगा।"
रजनी मुस्कुराते हुए बोली, "जमींदार साहब, आप बिल्कुल बेफिक्र रहिए। आप मुझे पैसे दीजिए, मैं घर जाती हूँ और रात १०:०० बजे जैसे ही मेरा पति सो जाएगा, मैं छिपते-छिपाते आपकी बैठक में पहुँच जाऊँगी।"
वेद प्रकाश खुश होकर अपनी अलमारी खोलता है और ₹५,००० निकालकर रजनी को थमा देता है। रजनी पैसे लेकर खुशी-खुशी अपने घर लौट जाती है।
३. संदेह और अनैतिकता की ओर कदम
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