DJ BHANU

DJ BHANU Official DJ for Speed Records
Owner: https://www.facebook.com/bigfatpunjabiweddings djbhanu will be star for the show.. That is his style..

DJ Bhanu has won many DJ Competitions in North India and was voted by simply Punjabi as the top DJ for North India

Played for the most elite clients like
MARUTI, SMIRNOFF, COCA COLA , HERO GROUP, TOYOTA, MTV, BACARDI, AVON CYCLES, TRIDENT INDUSTRIES, COUNTRY INN, BRITT WORLDWIDE AMWAY, WIZCRAFT(CHENNAI), 360 DEGREE(TIMES GROUP), SPICE TELECOM ... and the list goes on and on...........

DJ Bhanu has also been on main stages with many dj's like Aqeel, Suketu. Akabar Sami, DJ Rummy, DJ Ivan , DJ Nikhil Chinappa, JuggyD, Hardkaur, RDB , many more awesome DJs

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फौजी भाई की बहन के साथ गलत होने पर भाई फौजी ने कर दिया बड़ा कां*ड/आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के ...
04/10/2026

फौजी भाई की बहन के साथ गलत होने पर भाई फौजी ने कर दिया बड़ा कां*ड/

आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से। बागपत जिले में एक बांधपुर नाम का गांव पड़ता है और इसी बांधपुर गांव में रहने वाला राधेश्याम।

राधेश्याम की इस गांव के अंदर एक किराने की दुकान होती है। राधेश्याम की यह दुकान ठीक-ठाक चलती थी। राधेश्याम इससे अच्छी कमाई कर लिया करता था। राधेश्याम का स्वभाव बहुत ही मीठा होता है। बस इसी वजह से गांव के सभी लोग राधेश्याम की दुकान पर ही सामान खरीदने के लिए आया करते थे।

राधेश्याम बहुत ही खुशमिजाज व्यक्ति होता है। राधेश्याम की इस गांव में काफी इज्जत भी होती है। राधेश्याम के परिवार में इसका इकलौता ही बेटा होता है जिसका नाम सूरज होता है। सूरज जो कि 4 साल पहले फौज में भर्ती हो गया था और इस समय सूरज फौज में रहकर नौकरी करते हुए देश की सेवा करता है।

राधेश्याम के परिवार में इसकी एक इकलौती बेटी भी होती है जिसका नाम मीनाक्षी होता है। मीनाक्षी जिसने 12वीं कक्षा दो साल पहले पास कर ली थी। इस समय मीनाक्षी अपने घर पर रहकर घर के कामकाज करती है क्योंकि मीनाक्षी की मां की 3 साल पहले मौत हो चुकी थी जिसकी वजह से घर की सारी जिम्मेदारी मीनाक्षी के कंधों पर आ जाती है। मीनाक्षी घर के कामकाज करने के साथ-साथ अपने पिता के कामकाज में हाथ बटाया करती थी। जब भी पिता राधेश्याम दुकान के किसी जरूरी काम से बाहर चला जाया करता था तो इसके बाद मीनाक्षी देवी दुकान संभाल लिया करती थी।

यहां तक राधेश्याम के परिवार में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है। लेकिन आगे चलकर राधेश्याम की बेटी मीनाक्षी के साथ इस घर में रहते हुए बहुत बड़े-बड़े कां*ड होने वाले थे। जिसके बारे में ना तो राधेश्याम कुछ जानता था और ना ही राधेश्याम की बेटी मीनाक्षी कुछ जानती थी।

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पत्नी की एक गलती की वजह से पति ने ये सब कर दिया/आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से। का...
04/10/2026

पत्नी की एक गलती की वजह से पति ने ये सब कर दिया/

आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से। कानपुर जिले में 'पारस' नाम का एक गाँव पड़ता है। इसी पारस गाँव में वेद प्रकाश नाम का एक व्यक्ति रहता था। वेद प्रकाश पेशे से एक किसान था और उसके पास अपनी तीन-चार एकड़ जमीन थी। वह खेती-किसानी का काम करके जो भी पैसे कमाता था, उन सारे पैसों को अपने बैंक खाते में जमा करवा दिया करता था।

वेद प्रकाश की पत्नी की लगभग तीन साल पहले म/ौ/त हो चुकी थी, जिसकी वजह से वह अपने जीवन में अकेला पड़ गया था। पत्नी के चले जाने के बाद वेद प्रकाश का च/रि/त्र और नी/य/त बिगड़ने लगी थी। गाँव की या खेत के आसपास की कोई महिला अगर उसे दिखती, तो वह पैसों का लालच देकर उनके साथ अ/वै/ध संबंध बनाने की कोशिश करता और बाद में मामले को रफा-दफा कर देता था।

वेद प्रकाश के परिवार में उसका एक इकलौता बेटा था, जिसका नाम शेरपाल सिंह था। शेरपाल की शादी अंजलि देवी नाम की महिला से हुई थी। अंजलि देखने में काफी सुंदर और जवान महिला थी। हालाँकि, अंजलि का चाल-चलन और च/रि/त्र भी ठीक नहीं था। अंजलि का पति शेरपाल पेशे से एक ट्रक ड्राइवर था, जो महीनों तक घर से बाहर ही रहता था और महीने में केवल एक या दो बार ही घर आता था। शेरपाल काफी लालची किस्म का व्यक्ति था, जो हमेशा केवल पैसे कमाने के पीछे भागता रहता था और अपनी पत्नी की जरूरतों या मानसिक स्थिति का ख्याल नहीं रखता था। इसी वजह से अंजलि भी धीरे-धीरे गलत रास्ते पर चलने लगी।

अंजलि आगे चलकर तीन ऐसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाली थी, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था।

पहली घटना: कपड़े की दुकान और अ/वै/ध संबंध

समय बीतता गया और तारीख आई 5 जुलाई 2026। सुबह के लगभग 8:00 बजे का समय था। वेद प्रकाश घर के अंदर बैठकर खाना खा रहा था और उसकी बहु अंजलि रसोई में काम कर रही थी। तभी अंजलि अपने ससुर वेद प्रकाश के पास आई और बोली— "पिताजी, आपके बेटे तो 20 दिनों तक घर नहीं आने वाले हैं। मुझे अपने लिए कुछ नए कपड़े खरीदने हैं, इसलिए मुझे ₹5,000 दे दीजिए।"

वेद प्रकाश ने अजीब नजरों से देखते हुए साफ मना कर दिया और कहा कि उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। अंजलि मायूस हो गई। वेद प्रकाश खाना खाकर अपने खेतों की तरफ निकल गया।

इसके बाद अंजलि ने अपने पति शेरपाल को फोन मिलाया और पैसों की माँग की। शेरपाल ने भी कहा कि अभी उसके पास पैसे नहीं हैं, वह 20 दिन बाद आकर कपड़े दिलवा देगा। लेकिन अंजलि जिद पर अड़ गई। तब शेरपाल ने कहा— "अपने गाँव में प्रवीण की एक बहुत बड़ी कपड़े की दुकान है। तुम वहाँ जाकर उधारी में कपड़े ले आओ, मैं आने के बाद पैसे दे दूँगा।"

अंजलि तुरंत गाँव की उस दुकान पर पहुँची। दुकान चलाने वाला लड़का प्रवीण सुंदर महिलाओं पर कमजोर नी/य/त रखता था। वह अक्सर गाँव की महिलाओं को लुभाने के लिए उधारी या मुफ्त में कपड़े देकर उनके साथ ग/ल/त सांठ-गाँठ बना लेता था। जब अंजलि उसकी दुकान पर पहुँची और 4 साड़ियाँ तथा 4 सूट माँगे, तो प्रवीण ने दुकान के बाहर लगे बोर्ड का हवाला देते हुए उधारी देने से मना कर दिया।

अंजलि ने तब अपने घर की स्थिति का फायदा उठाते हुए प्रवीण से कहा— "मेरा पति ट्रक ड्राइवर है और बाहर है। घर में सिर्फ मेरा 6 साल का बेटा आरव है और ससुर दिन-रात खेतों में रहते हैं। आज मैं घर में अकेली हूँ, तुम रात में मेरे घर आ जाना और कपड़ों की पूरी कीमत वसूल कर लेना।"

प्रवीण इस बात पर राजी हो गया। उसने अंजलि को कपड़े दे दिए। उसी रात लगभग 9:00 बजे अंजलि ने अपने बेटे आरव को खाना खिलाकर सुला दिया और ससुर के खेत जाने के बाद प्रवीण को फोन करके घर बुला लिया। उस रात अंजलि और प्रवीण के बीच अ/वै/ध संबंध बने। इसके बाद प्रवीण अक्सर अंजलि को कुछ पैसे देकर उसके घर आने-जाने लगा।

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19 सितंबर को बूढी महिला के साथनमस्कार दोस्तों, स्वागत है आप सभी लोगों का एक नई कहानी के अंदर। आज की इस घटना के माध्यम से...
04/10/2026

19 सितंबर को बूढी महिला के साथ

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आप सभी लोगों का एक नई कहानी के अंदर। आज की इस घटना के माध्यम से मैं आप सभी लोगों को एक ऐसा म/मा/ला और क/ा/ं/ड बताने जा रहा हूँ, जिसे सुनने के बाद आप सभी हैरान रह जाएंगे।

यह कहानी एक खूबसूरत अधेड़ उम्र की बूढ़ी महिला और एक नौजवान लड़के के बीच घटी घटना की है। एक दिन शाम के वक्त वह महिला बाजार से अपने घर लौट रही थी, लेकिन रास्ते में उसका पैर फिसल गया और वह गिर पड़ी। तभी वहां से गुजर रहे एक नौजवान लड़के ने उसकी मदद की, उसे घर पहुँचाया और फिर चाय-पानी के बहाने दोनों के बीच एक अनूठी जान-पहचान बनी। लेकिन इसके बाद उन दोनों के बीच एक ऐसा ग/ल/त म/ा/म/ला और क/ा/ं/ड हुआ, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

आइए जानते हैं इस पूरी घटना को विस्तार से...

गाँव का माहौल और जानकी का अकेलापन

इस कहानी की शुरुआत होती है एक छोटे से शांत गाँव से। उस गाँव में जानकी नाम की एक अधेड़ उम्र की बहुत ही सुंदर महिला रहा करती थी। जानकी के पति का देहांत काफी समय पहले ही हो चुका था। उनके चले जाने के बाद जानकी एकदम अकेली पड़ गई थी। न तो उसका कोई बेटा था और न ही कोई बेटी।

अपना गुजारा चलाने के लिए जानकी ने घर पर लगभग चार भेड़ें और तीन बकरियाँ पाल रखी थीं। वह रोज सुबह उन्हें चराने के लिए खेतों में ले जाया करती थी और इन्हीं पशुओं के दूध व बिक्री से उसका जीवन-यापन चलता था।

पति के गुजर जाने के बाद जानकी के दिल में एक गहरा अकेलापन बस गया था। उसके पड़ोस में ही उसकी उम्र का एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था। जब भी वह जानकी को देखता, तो उसकी नी/य/त खराब हो जाती थी और वह उसे घूरता रहता था। जानकी सब समझती थी कि उस बूढ़े की मनशा ठीक नहीं है। पुराने ज़माने के लोग इशारों-इशारों में ही नी/य/त ताड़ लेते हैं। इसलिए जानकी हमेशा उस बूढ़े से दूरी बनाकर रखती थी।

जानकी जानती थी कि वह बूढ़ा उसके लायक नहीं है। लेकिन रात के सन्नाटे में जब जानकी अपने छोटे से घर में अकेली होती, तो उसे अपने पति की याद सताती थी। कभी-कभी उसका मन इतना व्याकुल हो जाता कि अपनी भा/व/ना/ओ/ं और म/न की शा/ं/ति के लिए उसे स्वयं ही ह/ा/थ का इ/स्ते/मा/ल करना पड़ता था। इसके बाद वह चुपचाप सो जाती और किसी को कानों-कान खबर नहीं होती थी।

लेकिन वह पड़ोसी बूढ़ा अक्सर रात के समय जानकी के घर के दरवाजे के पास आकर छिपकर ज/ा/सू/सी करता था और अंदर की आहट लेने की कोशिश करता था। जानकी का घर ज्यादा बड़ा नहीं था—केवल दो छोटे-छोटे कमरे थे। उस बूढ़े का घर सामने ही 20-30 मीटर की दूरी पर था, इसलिए वह रात में चुपके से आकर दरवाजे की झिर्रियों से दे/ख/ने की कोशिश करता था।

एक दिन शाम को करीब 6 बजे जानकी हिम्मत करके उस बूढ़े के घर पहुँची और उसकी पत्नी को सारी बात बता दी। जानकी ने कहा, "तुम्हारा पति ठीक आदमी नहीं है। वह रोज रात को मेरे घर के आसपास घूमता है और मेरे कमरे की ज/ा/सू/सी करता है।" यह सुनकर बूढ़े की पत्नी ने अपने पति को बहुत डांटा और समझाया कि जानकी मेरी सहेली है, उसे परेशान करना बंद करो। इस घटना के बाद उस बूढ़े ने रात में चक्कर लगाना बंद कर दिया।

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भतीजा और चाची खेत में गए थे/चाची ने कर दिया बड़ा कां**ड/आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज...
03/10/2026

भतीजा और चाची खेत में गए थे/चाची ने कर दिया बड़ा कां**ड/

आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से। बलरामपुर जिले में एक अमवा नाम का गाँव पड़ता है और इसी अमवा गाँव में रहने वाला वेद प्रकाश।

वेद प्रकाश के पास अपनी 6 एकड़ ज़मीन होती है। वह खेती-किसानी का काम किया करता था। वेद प्रकाश ने खेती-किसानी करके काफी अच्छा-खासा पैसा कमा रखा था। यहाँ तक कि वेद प्रकाश गाँव के ज़रूरतमंद लोगों को ब्याज पर पैसे भी दे दिया करता था, लेकिन वह कभी किसी गरीब को परेशान नहीं करता था। यही वजह थी कि गाँव के लोग वेद प्रकाश की बहुत इज़्ज़त करते थे। वेद प्रकाश स्वभाव से बहुत ही मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था।

वेद प्रकाश के परिवार में उसकी धर्मपत्नी थी, जिसका नाम साक्षी देवी था। साक्षी देखने में काफी सुंदर, खूबसूरत और जवान महिला थी। वह घर के कामकाज निपटाने के साथ-साथ अन्य जिम्मेदारियाँ भी बखूबी संभालती थी।

1. अधूरी इच्छाएँ और बढ़ता अकेलापन

साक्षी अक्सर अपने पति वेद प्रकाश से कहती थी:

"हमारे गाँव में कोई ब्यूटी पार्लर नहीं है। तुम ऐसा करो कि गाँव में ही मेरे लिए एक ब्यूटी पार्लर की दुकान खुलवा दो।"

वेद प्रकाश हमेशा मुस्कुराकर कहता:

"तुम फिक्र मत करो, मैं जल्द ही तुम्हारे लिए एक दुकान का इंतज़ाम कर दूँगा।"

पत्नी यह सुनकर खुश तो हो जाती थी, लेकिन मन ही मन वह काफी उदास और परेशान रहती थी। जब भी वेद प्रकाश खेत से थक-हारकर रात में घर लौटता, तो दोनों एक ही कमरे में सोते ज़रूर थे, लेकिन वेद प्रकाश अपनी पत्नी को वह श/ा/री/रि/क स/ु/ख नहीं दे पाता था, जो एक पत्नी को मिलना चाहिए।

इसकी मुख्य वजह यह थी कि लगभग 6 साल पहले जब वेद प्रकाश खेत जा रहा था, तब उसकी मोटरसाइकिल की टक्कर एक ट्रैक्टर से हो गई थी। उस दुर्घटना में उसके नि/जी अं/ग (प्रा/इ/वे/ट पा/र्/ट) पर गंभीर चोट आ गई थी, जिससे वह हिस्सा डैमेज हो गया था। डॉक्टरों ने भी साफ़ कह दिया था कि भविष्य में न तो उनके यहाँ संतान होगी और न ही वे श/ा/री/रि/क सम्बंधों की इच्छाएँ पूरी कर पाएँगे।

इसी वजह से वेद प्रकाश अपनी पत्नी साक्षी को संतुष्ट नहीं कर पाता था। लेकिन साक्षी जवान थी, खूबसूरत थी और उसकी अपनी कुछ श/ा/री/रि/क ज़रूरतें थीं। अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए साक्षी किसी भी हद से गुज़रने को तैयार थी। घर में रहते-रहते उसका अकेलापन गहराता जा रहा था, और इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए वह आगे चलकर दो बड़े कांडों को अंजाम देने वाली थी, जिससे उसका पति बिल्कुल बेखबर था।

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27 सितंबर को बहन के साथ भाई ने |नमस्कार दोस्तों! आज हम आपको एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर हर किसी...
03/10/2026

27 सितंबर को बहन के साथ भाई ने |

नमस्कार दोस्तों! आज हम आपको एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर हर किसी के होश उड़ जाएंगे। समाज में पारिवारिक रिश्तों, मर्यादा और सीमाओं को लेकर कई तरह की बातें होती हैं, लेकिन जब युवा अवस्था में नादानी और जिद्द हावी हो जाती है, तो उसके परिणाम पूरे परिवार और जीवन को तबाही की ओर ले जाते हैं।

यह कहानी एक छोटे से शांत गाँव मोहनिया की है, जहाँ की एक घटना ने पूरे क्षेत्र में ब/वे/ला खड़ा कर दिया था।

1. मोहनिया गाँव और पात्रों का परिचय

मोहनिया गाँव में बबीता नाम की एक बहुत ही सुंदर और नौजवान लड़की रहा करती थी। बबीता अपने माता-पिता की अकेली संतान थी। अकेली संतान होने के कारण उसके माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे और उस पर आँख बंद करके भरोसा करते थे। बबीता को घर से पूरी आजादी मिली हुई थी। वह गाँव से पास के कॉलेज में पढ़ाई करने जाया करती थी। उसके पास एक पुरानी साइकिल थी, जिससे वह रोज सुबह अपने कॉलेज के लिए निकलती थी।

बबीता के घर के ठीक सामने उसका चचेरा भाई रोहन रहता था। रोहन एक सीधा-साधा, मेहनती और जमीन से जुड़ा हुआ लड़का था। उसने दो-तीन साल पहले ही अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी और अब अपने पिता के साथ खेतों में खेती-बाड़ी का काम संभालता था।

चूँकि दोनों के घर आमने-सामने थे और वे रिश्ते में भाई-बहन लगते थे, इसलिए बबीता का रोहन के घर बिना किसी रोक-टोक के आना-जाना लगा रहता था। बबीता जब भी कॉलेज के लिए निकलती, तो पहले रोहन के घर जाती, वहाँ जो कुछ बना होता उसे खाती और फिर कॉलेज के लिए निकलती। दोनों का बचपन से साथ रहने के कारण आपस में बहुत गहरा लगाव हो गया था।

2. खेत और ट्यूबवेल का पहला मोड़

रोहन के खेत में फसलों की सिंचाई के लिए एक ट्यूबवेल (समरसिबल) लगा हुआ था, जो उनके घर से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर खेतों के बीच में स्थित था।

एक दिन दोपहर के समय बबीता रोहन के घर पहुँची। उस दिन बहुत तेज गर्मी थी। बबीता ने रोहन से कहा:

"रोहन, आज मेरा नहाने का बहुत मन कर रहा है। चलो तुम्हारे खेत वाले ट्यूबवेल पर चलते हैं और वहीं ठंडे पानी में नहाकर आते हैं।"

रोहन हमेशा बबीता की हर बात मानता था, इसलिए वह मना नहीं कर सका और दोनों खेत की ओर चले गए। जब वे ट्यूबवेल पर पहुँचे, तो मोटर चल रही थी और तेजी से ठंडा पानी बह रहा था।

बबीता ने रोहन से कहा कि दोनों एक साथ पानी में उतरकर नहाते हैं। इस पर रोहन ने झिझकते हुए कहा:

"नहीं बबीता, तुम लड़की हो और मैं लड़का हूँ। हमारा इस तरह एक साथ नहाना ठीक नहीं है। तुम पहले नहा लो, फिर मैं नहा लूँगा।"

लेकिन बबीता बहुत जिद्दी थी। उसने कहा कि उसे अकेले डर लगता है और अगर वह डूब गई तो? रोहन ने उसे समझाया कि यहाँ कोई गहरा पानी नहीं है, लेकिन बबीता अपनी जिद्द पर अड़ी रही। आखिरकार रोहन उसकी जिद्द के आगे हार गया और दोनों पानी में नहाने लगे।

नहाते समय बबीता ने अपने कुछ कपड़े हटा दिए। यह देखकर रोहन का मन व्याकुल हो गया और उसकी नी/य/त डगमगाने लगी। रोहन ने बबीता को समझाने की कोशिश की:

"बबीता, तुम यह क्या कर रही हो? तुम्हें इस तरह नहीं नहाना चाहिए। अगर गाँव के किसी व्यक्ति ने हमें इस हालत में देख लिया, तो हमारी बहुत ब/द/ना/मी होगी। हमारे माता-पिता का समाज में सिर झुक जाएगा और पारिवारिक रिश्ता हमेशा के लिए टूट जाएगा।"

लेकिन बबीता ने उसकी बात को हँसकर उड़ा दिया और कहा कि तुम बहुत डरते हो, यहाँ कोई नहीं देख रहा।

तभी अचानक दूर से गाँव के कुछ लड़कों की आवाजें सुनाई दीं, जो ट्यूबवेल की तरफ ही आ रहे थे। रोहन ने तुरंत बबीता को संभाला और दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। गाँव के लड़के वहाँ आए, उन्होंने रोहन से सामान्य बातचीत की और नहाने लगे। उस दिन तो वे किसी तरह बच गए, लेकिन उस घटना के बाद से बबीता और रोहन के बीच का रिश्ता और बातचीत का तरीका पूरी तरह बदल गया।

FULL STORY: https://yeuhanoi.net/vnki

कथा सुनने मंदिर में गई थी/पुजारी ने कर दिया बड़ा करनामा/आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के अ/मे/ठी जि...
03/10/2026

कथा सुनने मंदिर में गई थी/पुजारी ने कर दिया बड़ा करनामा/

आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के अ/मे/ठी जिले से। अ/मे/ठी जिले में एक बरना टीकर नाम का गांव पड़ता है और इसी बरना टीकर गांव में रहने वाला सतबीर सिंह।

सतबीर सिंह एक अ/पा/हि/ज व्यक्ति होता है। सतबीर सिंह की एक साल पहले ए/क्सी/डें/ट की वजह से दोनों टां/गें क/ट जाती हैं, जिसकी वजह से सतबीर सिंह अपने घर पर चा/र/पा/ई पर बैठ जाता है। सतबीर सिंह कुछ भी काम धंधा करने के लायक नहीं रहता है।

अब सतबीर सिंह के परिवार में इसकी धर्मपत्नी होती है जिसका नाम रीना देवी होता है। रीना देवी हर समय अपने घर के कामकाज में व्यस्त रहती थी। रीना देवी बहुत ही धार्मिक और संस्कारी महिला होती है। सतबीर सिंह के परिवार में इसकी एक भाभी भी होती है जिसका नाम बबीता देवी होता है। बबीता देवी के पास अपना एक 10 साल का बेटा होता है जिसका नाम सोनू होता है। लेकिन बबीता देखने में काफी खू/ब/सू/र/त, सुंदर और ज/वा/न महिला होती है। बबीता जब भी अपने घर से बाहर निकल जाया करती थी तो इस गांव के मर्द बबीता की सुंदर काया को बस देखते ही रह जाया करते थे।

यहाँ तक सतबीर सिंह के परिवार में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है। लेकिन आगे चलकर सतबीर सिंह की पत्नी रीना देवी और सतबीर की भाभी बबीता के साथ बहुत बड़े-बड़े का/ं/ड होने वाले थे, जिसके बारे में ना तो सतबीर कुछ जानता था और ना ही रीना और बबीता कुछ जानती थीं।

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कथा सुनने मंदिर में अकेली पूजा करने गई थी और पुजारियों ने कर दिया करनामा/प्रस्तावना:आज की हमारी इस दर्दनाक और खौफ़नाक घट...
02/10/2026

कथा सुनने मंदिर में अकेली पूजा करने गई थी और पुजारियों ने कर दिया करनामा/

प्रस्तावना:

आज की हमारी इस दर्दनाक और खौफ़नाक घटना की शुरुआत होती है भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अमेठी जिले से। अमेठी जिले के अंतर्गत 'बरना टीकर' नाम का एक गाँव पड़ता है। इसी बरना टीकर गाँव में रहने वाला एक सीधा-साधा व्यक्ति है—सतबीर सिंह।

१. अपाहिज सतबीर और एक संस्कारी परिवार

सतबीर सिंह एक दुर्भाग्यशाली और अपाहिज व्यक्ति था। लगभग एक साल पहले एक भीषण सड़क हादसे में उसने अपनी दोनों टाँगें गँवा दी थीं। टाँगें कट जाने के कारण सतबीर अपने घर में चारपाई पर ही रहने के लिए मजबूर हो गया था। वह किसी भी प्रकार का काम-धंधा करने में पूरी तरह असमर्थ था।

सतबीर के परिवार में उसकी धर्मपत्नी रीना देवी थी। रीना देवी दिन-रात घर के कामकाज में व्यस्त रहती थी और अपने बीमार व लाचार पति की सच्चे दिल से सेवा करती थी। रीना एक बेहद संस्कारी, धार्मिक और सरल स्वभाव की महिला थी।

इसी परिवार में सतबीर की एक विधवा भाभी भी रहती थी, जिसका नाम बबीता देवी था। बबीता का एक १० साल का बेटा था, जिसका नाम सोनू था। बबीता देवी देखने में अत्यंत रूपवती, सुंदर और युवा महिला थी। जब भी बबीता गाँव की गली-मोहल्ले से गुजरती, तो गाँव के लोगों की नज़रें उसकी सुंदरता पर टिक जाया करती थीं।

यहाँ तक तो सतबीर के परिवार में सब कुछ जैसे-तैसे चल रहा था। लेकिन आगे चलकर इस परिवार की दोनों बहुओं—रीना और बबीता—के साथ ऐसी भयावह घटनाएँ घटने वाली थीं, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।

२. उजाड़ मंदिर और सरपंच की कुदृष्टि

समय बीतता गया। एक दिन सुबह के लगभग ८:३० बजे रीना देवी और बबीता देवी अपने घर के काम-काज निपटा रही थीं। तभी उनकी एक पड़ोसन, कविता देवी, उनके घर आई। कविता ने देखा कि सतबीर चारपाई पर लेटा हुआ है और उसकी हालत कुछ ठीक नहीं है।

कविता ने रीना से कहा, "रीना, तुम तो बड़ी धार्मिक और संस्कारी महिला हो। घर में तो तुम पूजा करती ही हो, लेकिन तुम्हें और बबीता को रोज़ गाँव के मंदिर में भी पूजा-अर्चना के लिए जाना चाहिए। भगवान के आशीर्वाद से सतबीर की सेहत में सुधार हो सकता है।"

रीना देवी ने उत्तर दिया, "ठीक है चाची, हम कल सुबह से ही मंदिर जाना शुरू कर देंगे।"

अगले दिन सुबह ५:०० बजे रीना और बबीता पूजा की थाली लेकर गाँव के बाहर स्थित मंदिर पहुँचीं। परंतु मंदिर पहुँचकर उन्होंने देखा कि वहाँ कोई पुजारी नहीं था। चारों तरफ गंदगी फैली हुई थी, आवारा पशु और कुत्ते मंदिर परिसर में गंदगी फैला रहे थे।

पूजा समाप्त करने के बाद बबीता ने कहा, "रीना, मंदिर की देखरेख के लिए एक पुजारी का होना बहुत ज़रूरी है।"

रीना ने सुझाव दिया, "चलो, हम गाँव के सरपंच सूरजपाल सिंह के पास चलते हैं। वही इस मंदिर में किसी पुजारी की व्यवस्था करवा सकते हैं।"

दोनों महिलाएँ सरपंच सूरजपाल के घर पहुँचीं। परंतु सूरजपाल सरपंच एक बेहद चरित्रहीन, कामुक और लालची इंसान था। ३ साल पहले उसकी पत्नी का देहांत हो चुका था, जिसके बाद वह पराई औरतों पर गंदी नज़र रखने लगा था। उसने पैसों और पावर के दम पर गाँव की कई असहाय महिलाओं के साथ अ/नै/तिक सं/बंध बना रखे थे।

जैसे ही रीना और बबीता उसके सामने पहुँचीं, सरपंच सूरजपाल की गंदी नज़रें उन दोनों महिलाओं के सौंदर्य पर टिक गईं। उसने मन ही मन ठान लिया कि किसी भी कीमत पर इन दोनों को हासिल करना है।

जब बबीता ने मंदिर में पुजारी की व्यवस्था करने की बात कही, तो सरपंच ने मुस्कुराते हुए कहा, "बबीता जी, आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। मैं आज ही मंदिर के लिए एक पुजारी का प्रबंध करवा देता हूँ।"

दोनों महिलाएँ निश्चिंत होकर अपने घर लौट आईं, लेकिन सरपंच की नापाक नीयत उन पर टिक चुकी थी।

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ससुर के साथ मिलकर कर दिया करनामा/ससुर की हुई मौ*त/आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है भारत के राजस्थान राज्य के उदयपुर...
02/10/2026

ससुर के साथ मिलकर कर दिया करनामा/ससुर की हुई मौ*त/

आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है भारत के राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले से। उदयपुर जिले के अंतर्गत 'बेडला' नाम का एक प्रसिद्ध गाँव पड़ता है। इसी बेडला गाँव में रहने वाला मुख्य पात्र है—वेद प्रकाश।

१. जमींदार वेद प्रकाश और उसका परिवार

वेद प्रकाश इस पूरे गाँव का सबसे बड़ा जमींदार माना जाता था। उसके पास अपनी कुल २८ एकड़ उपजाऊ ज़मीन थी। धन, संपत्ति और सामाजिक प्रभाव की वजह से वेद प्रकाश के पास पैसा और पावर दोनों की कोई कमी नहीं थी। परंतु वेद प्रकाश अपने इस धन और बल का हमेशा गलत इस्तेमाल किया करता था।

इन्हीं दुर्गुणों के कारण गाँव के अंदर वेद प्रकाश की ज़रा सी भी इज़्ज़त नहीं थी। गाँव वाले उसका आदर नहीं करते थे, क्योंकि उसका चाल-चलन और चरित्र अत्यधिक खराब था। वेद प्रकाश ने अपने घर के बाहर एक बहुत ही आलीशान और सुसज्जित बैठक बना रखी थी। वह प्रतिदिन रात के समय भारी मात्रा में श/राब पिया करता था। श/राब के न/शे में धुत होने के बाद वह अपनी इस आलीशान बैठक में गाँव की निर्धन व असहाय परिवारों की सुंदर महिलाओं को बुला लिया करता था और उनके साथ अपनी रातें गुज़ारकर अपना बि/स्तर ग/र्म किया करता था। वेद प्रकाश की जीवनशैली का बस यही एक मुख्य काम बन चुका था।

वेद प्रकाश के परिवार में उसका एक बेटा था, जिसका नाम अजय था। इसके अलावा उसकी एक बहू भी थी, जिसका नाम पिंकी देवी था। पिंकी देवी दिन-रात अपने घर के सारे कामकाज में व्यस्त रहती थी। पिंकी देखने में अत्यंत सुंदर, रूपवती और युवा महिला थी। परंतु उसका पति अजय एक न/शे/ड़ी किस्म का व्यक्ति था, जो हर समय तरह-तरह के न/शे में डूबा रहता था। श/रा*ब का अति न/शा करने के बाद अजय अपनी पत्नी पिंकी के साथ छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा और मारपीट किया करता था। पिंकी अपने पति के इस व्यवहार से बहुत दुखी और परेशान आ चुकी थी।

यहाँ तक तो वेद प्रकाश के परिवार में सब कुछ जैसे-तैसे चल रहा था। लेकिन आगे चलकर वेद प्रकाश दो ऐसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाला था, जिसकी गूँज पूरे जिले में सुनाई देने वाली थी।

२. लालच, कर्ज़ और अनैतिक इच्छाएँ

कुछ समय बीत जाने के बाद एक दिन सुबह के लगभग ११:०० बजे का समय था। पिंकी देवी हमेशा की तरह अपने घर के काम-काज निपटा रही थी। उसी समय पिंकी का ससुर वेद प्रकाश खेत से थका-हारा अपने घर लौटता है। घर में प्रवेश करते ही वेद प्रकाश देखता है कि बहू पिंकी के अलावा घर में कोई और मौजूद नहीं है।

पिंकी के रूप, सौंदर्य और उसकी जवानी को देखकर ससुर वेद प्रकाश की नीयत अचानक खराब हो जाती है। वह अपनी बहू को अ/नौ/चि*त नज़रों से देखते हुए कड़क आवाज़ में कहता है, "पिंकी! जल्दी से मेरे लिए खाना लेकर आओ।"

पिंकी बिना कोई देर किए तुरंत रसोई से खाना तैयार करके अपने ससुर के सामने परोस देती है। लेकिन वेद प्रकाश खाना खाने के बजाय पिंकी के शरीर को ऊपर से नीचे तक घूरता रहता है। उसी समय पिंकी अपने ससुर से कहती है, "पिताजी, मुझे आज ३,००० रुपये की सख्त ज़रूरत है। मुझे अपने लिए कुछ कपड़े खरीदने हैं और अजय के लिए भी कपड़े लेने हैं, उनके कपड़े काफी पुराने हो चुके हैं।"

यह सुनते ही वेद प्रकाश तुरंत रुखाई से जवाब देता है, "तुम दोनों के लिए मेरे पास एक भी रुपया नहीं है। अगर मेरे पास पैसे होते भी, तब भी मैं तुम्हें एक फूटी कौड़ी नहीं देता!"

ससुर के ऐसे कड़वे शब्द सुनकर पिंकी काफी परेशान और उदास हो जाती है। वह चुपचाप ससुर को खाना देकर रसोई के भीतर चली जाती है। वेद प्रकाश बैठकर खाना खा ही रहा होता है कि तभी गाँव की एक पड़ोसन महिला, जिसका नाम रजनी देवी था, उसके घर में प्रवेश करती है।

रजनी देवी जैसे ही घर के अंदर आती है, वेद प्रकाश की नज़रें उसके गोरे और सुंदर बदन पर टिक जाती हैं। रजनी देवी एक ऐसी महिला थी जिसका चाल-चलन गाँव में ठीक नहीं माना जाता था। वह गाँव के अमीर लोगों को अपने प्रेम-जाल में फँसाकर उनके साथ अ/नै/तिक सं/बंध बनाती और उनसे मोटी रकम वसूल कर लिया करती थी। आज भी रजनी देवी वेद प्रकाश पर अपने डोरे डालने के इरादे से आई थी।

वेद प्रकाश भी इस खेल में पीछे रहने वाला नहीं था। उसने रजनी की सुंदरता को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "रजनी! आओ मेरे पास बैठो, मैं तुम्हें खाना खिलाता हूँ।"

परंतु रजनी देवी बोली, "जमींदार साहब! मैं यहाँ खाना खाने नहीं आई हूँ। मुझे अचानक ५,००० रुपये की सख्त ज़रूरत आ पड़ी है। आप मुझे ५,००० रुपये कर्ज़ के तौर पर दे दीजिए, मैं अगले महीने ब्याज सहित लौटा दूँगी।"

वेद प्रकाश ने हँसते हुए कहा, "रजनी! तुम्हें पैसों की चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। अगर तुम्हें ५,००० रुपये चाहिए तो तुम्हें मेरे साथ कमरे में चलना होगा।"

रजनी भी चालाक थी, वह मुस्कुराकर बोली, "जमींदार साहब, आप जहाँ कहेंगे मैं चलने को तैयार हूँ।"

इसके बाद वेद प्रकाश रजनी देवी को अपने कमरे के अंदर ले जाता है। कमरे में पहुँचते ही वह रजनी से कहता है, "देखो रजनी, मैं रात के समय अपनी अलग बैठक में सोता हूँ। वहाँ रात में कोई नहीं आता। मैं तुम्हें अभी के अभी ५,००० रुपये दे देता हूँ, लेकिन शर्त यह है कि आज रात १०:०० बजे तुम्हें मेरी बैठक में आना होगा और मेरा बि/स्तर ग/र्म करना होगा।"

रजनी मुस्कुराते हुए बोली, "जमींदार साहब, आप बिल्कुल बेफिक्र रहिए। आप मुझे पैसे दीजिए, मैं घर जाती हूँ और रात १०:०० बजे जैसे ही मेरा पति सो जाएगा, मैं छिपते-छिपाते आपकी बैठक में पहुँच जाऊँगी।"

वेद प्रकाश खुश होकर अपनी अलमारी खोलता है और ₹५,००० निकालकर रजनी को थमा देता है। रजनी पैसे लेकर खुशी-खुशी अपने घर लौट जाती है।

३. संदेह और अनैतिकता की ओर कदम

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कॉलेज छुट्टियां चल रही थी तो बेटा दिनभर घर पर रहता था।परिचय: एक आधुनिक और खुला परिवारयह कहानी गुजरात के रहने वाले एक नवय...
02/10/2026

कॉलेज छुट्टियां चल रही थी तो बेटा दिनभर घर पर रहता था।

परिचय: एक आधुनिक और खुला परिवार

यह कहानी गुजरात के रहने वाले एक नवयुवक विराट की है। विराट का परिवार काफ़ी आधुनिक, शिक्षित और खुले विचारों वाला था। परिवार में उसके पिता बृजमोहन, जो एक नामी प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थे; उसकी माता शालिनी, जो एक सुशिक्षित गृहणी थीं; और उसकी छोटी बहन अनुष्का थी, जो हाई स्कूल में पढ़ाई कर रही थी।

विराट के माता-पिता की लव मैरिज हुई थी। घर का माहौल हमेशा खुशनुमा और दोस्ताना रहता था। शालिनी जी अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखती थीं। शिक्षित होने के कारण घर में जीन्स, टॉप और कैजुअल वेस्टर्न कपड़े पहनना उनके लिए बेहद आम बात थी।

हालाँकि, इस परिवार में एक बात बहुत खास थी—विराट वास्तव में इस परिवार का गोद लिया हुआ बच्चा (Adopted Child) था। बृजमोहन और शालिनी ने उसे बचपन से ही अपनी सगी संतान से भी बढ़कर प्यार और दुलार दिया था। विराट भी उन्हें ही अपने माता-पिता मानता था और परिवार में कभी किसी को इस बात का अहसास नहीं होने दिया गया।

अध्याय 1: छुट्टियों की शुरुआत और मन का भटकना

समय बीतने के साथ विराट कॉलेज पहुँच गया। कॉलेज की वार्षिक परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी थीं और भीषण गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो गई थीं। उसी दौरान उसकी बहन अनुष्का की भी छुट्टियाँ थीं। अनुष्का ने अपनी नानी के घर जाने की जिद की, तो उसके पिता बृजमोहन जी उसे नानी के घर छोड़ आए।

विराट ने घर पर ही रहकर अपनी छुट्टियाँ बिताने का फैसला किया। वह दिनभर अपने लैपटॉप पर गेम खेलता, मोबाइल चलाता और आराम करता।

एक दिन घर की काम वाली बाई छुट्टी पर थी। पिता जी सुबह ऑफिस निकल चुके थे और माँ शालिनी घर के काम समेट रही थीं। उन्होंने बिना दुपट्टे का एक कैजुअल हाउस ड्रेस पहना हुआ था। जब शालिनी जी झाड़ू लगाते हुए विराट के कमरे में आईं, तो विराट बेडरूम में बैठकर लैपटॉप पर गेम खेल रहा था।

माँ को इस बेफिक्र अंदाज़ में काम करते देख विराट की नज़रें उन पर टिक गईं। शालिनी जी का ध्यान जब उस पर पड़ा, तो उन्होंने सहजता से कहा, "उठ विराट, मुझे बेडशीट ठीक करने दे, फिर आराम से गेम खेलना।"

विराट घबराकर अपनी नज़रें फेरने लगा और चुपचाप बाथरूम की ओर चला गया। उसके मन में पहली बार अजीब सी उलझन पैदा हुई।

अध्याय 2: इंटरनेट की कहानियाँ और योजना की शुरुआत

बाथरूम से बाहर आने के बाद भी विराट का मन शांत नहीं था। वह अपने बेडरूम में आकर मोबाइल पर टाइम पास करने लगा। तभी उसके फोन पर एक डिजिटल स्टोरी प्लेटफॉर्म का नोटिफिकेशन आया।

उसने उस लिंक पर क्लिक किया, जहाँ पारिवारिक रिश्तों पर आधारित कई कहानियाँ थीं। उन कहानियों में से एक कहानी पढ़कर उसके मन में कुछ अ/सं/यत और ग/ल/त विचार आने लगे। जब वह किचन में पानी पीने गया, तो उसने अपनी माँ को पीछे से देखा जो खाना बनाने में व्यस्त थीं।

शालिनी जी ने पीछे मुड़कर देखा कि विराट उन्हें लगातार निहार रहा है, तो उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, "क्या हुआ विराट? ऐसे क्या देख रहा है?"

विराट ने बात सँभालते हुए कहा, "कुछ नहीं मम्मी, बस देख रहा था कि आप सुबह से शाम तक कितनी मेहनत करती हैं।"

शालिनी जी के चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान आ गई। उन्होंने हँसते हुए कहा, "हाँ बेटा! कुछ सालों में तेरी शादी हो जाएगी, तो बहु आ जाएगी और मेरी मदद हो जाएगी।"

विराट अपने कमरे में आ गया, लेकिन उसके दिमाग में खयालों का तूफान चल रहा था।

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