08/19/2025
न जाने कहाँ से, आया वो बहाना
भरता गया मेरी यादों का ख़ज़ाना।
ISO की रेंज ने सिखाया
मन की संवेदनशीलता
Shutter की गति से आया
जीवन में विनम्रता।
माप लेती थी मैं
ज़ूम-इन, ज़ूम-आउट से लोगों की मुस्कुराहट
पता चलता था किसके चेहरे पर है राहत।
छोटे पलों को क़ैद कर बनाती कहानियाँ
स्मृति को संजोकर जोड़ देती मैं कड़ियाँ।
बदलते रंग, बदल जाती है काया
सब कुछ है कैमरे की ही माया।
~वंदना वात्स्यायन
न्यू जर्सी
विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस की सभी फ़ोटोग्राफ़र को ढेरों शुभकामनाएँ।
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