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22/09/2025
>  *त्रैमासिक, हिन्दी, साहित्य सारांश' -अन्तरराष्ट्रीय* पत्रिका का वर्ष:- 2, अंक: 4 (अक्तूबर - दिसंबर-2024) प्रकाशित करन...
07/10/2024

> *त्रैमासिक, हिन्दी, साहित्य सारांश' -अन्तरराष्ट्रीय* पत्रिका का वर्ष:- 2, अंक: 4 (अक्तूबर - दिसंबर-2024) प्रकाशित करना हमारी संस्था के लिए गर्व का विषय हैं.
> हमारे ग्राफिक्स डिज़ाइनर की महत्वपूर्ण रचनात्मकता के कारण हम हर अंक को बेहतर से बेहतरीन बनाने में कामयाब हुए हैं. आप अनुभव करेंगे कि हर एक बार का अंक पिछले अंकों से ज्यादा सुन्दर है.
> पिछले अंक की तरह इस बार भी हमारी क़ाबिल संपादक का लिखा हुआ सम्पादकीय बहुत ही महत्वपूर्ण है। साथ ही *"महाकवि की ग़ज़लें"* और अन्तरराष्ट्रीय स्तर के लेखक और शायर एम आई ज़ाहिर का *"फीचर"* इस अंक में भी मिलेगा.
> वादे के मुताबिक "समान्य ज्ञान" के लिए एक पन्ना संरक्षित कर दिया गया है ,ताकि विद्यार्थी वर्ग को भी इस पत्रिका से लाभ पहुंच सके.
> भविष्य में अक्षरों के साइज की बढ़ोतरी का भी विचार है, जिसकी वजह से पन्नों की कमी हो सकती है, ऐसे मे रचनाओं के चयन में सख्त होना हमारी मजबूरी बन जाएगा.
> इस अंक में अगर आपकी कोई रचना प्रकाशित हुई हो तो उसका स्क्रीन शाॅट फेसबुक पर पोस्ट कर के मुझे भी टैग करें। आप की प्रतिकिय्रा, आशीर्वाद और स्नेह के आकांक्षी

> *त्रैमासिक, हिन्दी, साहित्य सारांश' -अन्तरराष्ट्रीय* का जुलाई-सितंबर वर्ष:- 2, अंक: 3 प्रकाशित करना हमारी संस्था के लि...
10/07/2024

> *त्रैमासिक, हिन्दी, साहित्य सारांश' -अन्तरराष्ट्रीय* का जुलाई-सितंबर वर्ष:- 2, अंक: 3 प्रकाशित करना हमारी संस्था के लिए गर्व का विषय हैं.

> हमारे ग्राफिक्स डिज़ाईनर जो के शायर भी हैं, उनकी महत्तवपुर्ण रचनातमकता के कारण हम इस अंक को बेहतर बनाने में कामयाब हुए हैं. आप ऐसा जरूर अनुभव करेंगे की इस बार का अंक पिछले अंकों से ज्यादा सुन्दर है.

> हर बार की तरह हमारी क़ाबिल संपादक द्वारा लिखा हुआ सम्पादकिय बहुत ही महत्तवपुर्ण है, साथ ही *"महाकवि की ग़ज़लें"* और अन्तरराष्ट्रीय स्तर के लेखक और शायर मुश्ताकुल ईस्लाम ज़ाहीर का *"फिचर"* अब आपको हर अंक में मिलेगा.

> जल्द ही हमलोग "समान्य ज्ञान" के लिए एक पन्ना संरक्षित करना चाहते हैं, ताकी हम विद्यार्थी वर्ग को भी इस पत्रिका से लाभ पहुंचा सकें.

> भविष्य में अक्षरो के आकार की बढोतरी का भी विचार है, जिसकी वज्ह से पन्नों की कमी हो सकती है, ऐसे मे रचनाओं के चयन में सख्त होना हमारी मजबुरी बन जाएगी.

> इस अंक में अगर आपकी कोई रचना प्रकाशित हुई हो तो उसका स्क्रिन शाॅट फेसबुक पर पोस्ट कर के मुझे भी टैग करें।

आप की प्रतिकिय्रा, आशीर्वाद और स्नेह के आकांक्षी रहेंगे।

06/06/2024

इस अह्द-ए-पुर'फ़रेब मे एकाध दोस्त भी
जो बच गया तो उस को गनीमत शुमार कर//
डा.अफ़रोज आलम

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