02/02/2017
अब आदत सी हो गइ है उसके गली को...मेरी,
अब गली का पानवाला भी थमा देता है मेरे हाथ मे 'मेरा पान' बिना बताए,
जैसे खाने की कतार मे मिलता है खाना किसी कैदी को ... बिना बताए
मुझे देखतेही आज गली ने पुछा "कल रात आए नही?"
मैने कहा... कल तुफानी बारीश थी
गली ने कहा "पगले, वो आइ थी, राह देखी, रोते रोते चली गइ"
सोचता हू... कल बारीश इतनी परेशान क्यों थी?
सोचता हू... क्यों सिर्फ भीगा था मै अकेला उन बेजज्बाती लाशों के बीच
भूषण