15/06/2026
क्या आप जानते हैं कि 1786 में बने पटना के वि शाल गोलघर में कोई खिड़की नहीं है? फिर भी इसके अनूठे वेंटिलेशन और गुंबददार डिजाइन के कारण, इसमें रखा 1.4 लाख टन अनाज कभी खराब नहीं होता था। यह ऐतिहा सिक वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है!
ऐतिहासिक उद्देश्य: 1770 के भयानक बंगाल-बिहार अकाल के बाद, ब्रिटिश अधिकारी जॉन गार्स्टिन द्वारा 1786 में इसे एक विशाल अन्न भंडार के रूप में बनवाया गया था|खिड़की रहित संरचना: इस इमारत में कोई पारंपरिक खिड़की या खंभा नहीं है| इसकी दीवारें आधार पर 3.6 मीटर (लगभग 12 फीट) तक मोटी हैं, जो अंदर का तापमान सामान्य रखती हैं|वेंटिलेशन प्रणाली: शीर्ष पर स्थित एक गोलाकार छेद से हवा का आवागमन होता है, जिससे नमी जमा नहीं होती और अनाज को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है|अनोखी सीढ़ियां: इसके चारों ओर 145 सीढ़ियों वाली दोहरी सर्पिल (स्पाइरल) सीढ़ियां हैं। श्रमिक एक तरफ से अनाज का बोरा लेकर ऊपर जाते थे और दूसरी तरफ से नीचे उतर आते थे|भंडारण का रहस्य: हालांकि इसका दावा किया जाता है कि इसमें रखा अनाज कभी खराब नहीं होता था, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस इमारत का कभी पूरा उपयोग नहीं हो सका| फिर भी, यह उस दौर के निर्माण कौशल का एक बेजोड़ उदाहरण है|