16/04/2026
मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है ||
मंदसौर हत्याकांड: बेवफाई और खूनी साजिश की सच्ची दास्तां
इंसान की बुद्धि जब भ्रष्ट होती है, तो वह अपनों के खून का प्यासा बन जाता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के दूधाखेड़ी गांव में घटी यह घटना इसी 'विपरीत बुद्धि' का जीवंत उदाहरण है। ३९ वर्षीय धनराजनाथ, जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे, उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनके घर का चिराग बुझाने वाली कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पत्नी होगी।
१. परिवार और संदिग्ध मित्रता
धनराजनाथ के परिवार में उनकी ३५ वर्षीय पत्नी धापू बाई और दो बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) थे। धनराज का एक करीबी दोस्त था, ४० वर्षीय पंकज चौधरी। पंकज अक्सर धनराज के घर आता-जाता था। लेकिन इस मित्रता की आड़ में एक /अपवित्र कहानी/ लिखी जा रही थी। पंकज और धापू बाई के बीच धीरे-धीरे /अवैध प्रेम प्रसंग/ शुरू हो गया।
२. शक की चिंगारी और झगड़ा
पिछले ५ वर्षों से धापू बाई और पंकज एक-दूसरे के /निकट/ थे। वे फोन पर घंटों बातें करते और मौका मिलने पर /एकांत में मुलाकात/ भी करते थे। जब गांव में चर्चाएं शुरू हुईं, तो धनराज के कानों तक भी यह बात पहुंची। धनराज ने अपनी पत्नी से पूछताछ की, लेकिन धापू ने /छल-कपट/ का सहारा लेकर उसे गुमराह किया।
धापू बाई अक्सर झगड़ा कर अपने मायके चली जाती थी, ताकि वहां से वह पंकज से आसानी से मिल सके। दोनों ने तय कर लिया था कि वे साथ रहेंगे, लेकिन धनराज उनके रास्ते का कांटा बना हुआ था। अंततः धापू ने पंकज से कहा कि वह धनराज को /रास्ते से हटा/ दे।
३. १० अप्रैल की खूनी रात
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