DJ BHANU

DJ BHANU Official DJ for Speed Records
Owner: https://www.facebook.com/bigfatpunjabiweddings djbhanu will be star for the show.. That is his style..
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DJ Bhanu has won many DJ Competitions in North India and was voted by simply Punjabi as the top DJ for North India

Played for the most elite clients like
MARUTI, SMIRNOFF, COCA COLA , HERO GROUP, TOYOTA, MTV, BACARDI, AVON CYCLES, TRIDENT INDUSTRIES, COUNTRY INN, BRITT WORLDWIDE AMWAY, WIZCRAFT(CHENNAI), 360 DEGREE(TIMES GROUP), SPICE TELECOM ... and the list goes on and on...........

DJ Bhanu

has also been on main stages with many dj's like Aqeel, Suketu. Akabar Sami, DJ Rummy, DJ Ivan , DJ Nikhil Chinappa, JuggyD, Hardkaur, RDB , many more awesome DJs

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मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है ||मंदसौर हत्याकांड: बेवफाई और खूनी साजि...
16/04/2026

मंदसौर | आखिर औरतें मर्दों से चाहती क्या है क्यों अपने पतियों के साथ ऐसा करती है ||
मंदसौर हत्याकांड: बेवफाई और खूनी साजिश की सच्ची दास्तां

इंसान की बुद्धि जब भ्रष्ट होती है, तो वह अपनों के खून का प्यासा बन जाता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के दूधाखेड़ी गांव में घटी यह घटना इसी 'विपरीत बुद्धि' का जीवंत उदाहरण है। ३९ वर्षीय धनराजनाथ, जो मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे, उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनके घर का चिराग बुझाने वाली कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पत्नी होगी।

१. परिवार और संदिग्ध मित्रता

धनराजनाथ के परिवार में उनकी ३५ वर्षीय पत्नी धापू बाई और दो बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) थे। धनराज का एक करीबी दोस्त था, ४० वर्षीय पंकज चौधरी। पंकज अक्सर धनराज के घर आता-जाता था। लेकिन इस मित्रता की आड़ में एक /अपवित्र कहानी/ लिखी जा रही थी। पंकज और धापू बाई के बीच धीरे-धीरे /अवैध प्रेम प्रसंग/ शुरू हो गया।

२. शक की चिंगारी और झगड़ा

पिछले ५ वर्षों से धापू बाई और पंकज एक-दूसरे के /निकट/ थे। वे फोन पर घंटों बातें करते और मौका मिलने पर /एकांत में मुलाकात/ भी करते थे। जब गांव में चर्चाएं शुरू हुईं, तो धनराज के कानों तक भी यह बात पहुंची। धनराज ने अपनी पत्नी से पूछताछ की, लेकिन धापू ने /छल-कपट/ का सहारा लेकर उसे गुमराह किया।

धापू बाई अक्सर झगड़ा कर अपने मायके चली जाती थी, ताकि वहां से वह पंकज से आसानी से मिल सके। दोनों ने तय कर लिया था कि वे साथ रहेंगे, लेकिन धनराज उनके रास्ते का कांटा बना हुआ था। अंततः धापू ने पंकज से कहा कि वह धनराज को /रास्ते से हटा/ दे।

३. १० अप्रैल की खूनी रात

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उस रात मुझे टीटी के साथ समझौता करना पड़ा 😭 | मेरी मजबूरी का फायदा उठाया | ट्रेन का वह सफर: मजबूरी, पछतावा और एक नई शुरुआ...
16/04/2026

उस रात मुझे टीटी के साथ समझौता करना पड़ा 😭 | मेरी मजबूरी का फायदा उठाया |

ट्रेन का वह सफर: मजबूरी, पछतावा और एक नई शुरुआत

इंसान के जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं जो हमेशा के लिए अमिट छाप छोड़ जाते हैं। बनारस की रहने वाली २६ वर्षीय गीता के लिए वह रात का सफर कुछ ऐसा ही था, जिसने उसकी पूरी दुनिया को एक पल के लिए हिलाकर रख दिया, लेकिन अंततः उसे जीवन का एक नया अर्थ भी दिया।

१. वह मनहूस शुरुआत

गीता एक बहुत ही सुंदर, सरल और संस्कारी युवती थी। वह बनारस से दिल्ली अपने भाई-बहन से मिलने के लिए एक्सप्रेस ट्रेन का इंतजार कर रही थी। प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ थी। जैसे ही ट्रेन आई, गीता किसी तरह धक्का-मुक्की कर स्लीपर कोच के अंदर अपनी विंडो सीट पर जाकर बैठ गई।

ट्रेन चलने के कुछ ही देर बाद जब उसने अपना पर्स खोला, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पर्स से पैसे और टिकट दोनों गायब थे। शायद स्टेशन की भीड़ में किसी ने उसका पर्स काट लिया था। गीता की आंखों में आंसू आ गए। वह सोचने लगी कि बिना टिकट पकड़े जाने पर वह टीटी (TTE) को क्या जवाब देगी।

२. टीटी से मुलाकात और /मजबूरी का फायदा/

रात के करीब १२:०० बज रहे थे। कोच की लाइटें बंद हो चुकी थीं और यात्री सो रहे थे। तभी एक २८ वर्षीय नौजवान टीटी वहां पहुंचा। गीता ने डर के मारे चादर ओढ़ ली, लेकिन टीटी ने उसे जगाकर टिकट मांगा।

गीता ने अपनी पूरी सच्चाई बताई कि उसका टिकट और पैसे चोरी हो गए हैं। लेकिन टीटी ने उस पर विश्वास नहीं किया। उसने कहा, "मैडम, आप जैसी लड़कियां रोज मिलती हैं जो पकड़े जाने पर रोने लगती हैं। या तो जुर्माना भरिए, वरना मैं आपको अगले स्टेशन पर पुलिस के हवाले कर दूंगा।"

गीता पुलिस का नाम सुनकर बुरी तरह डर गई। वह अकेली थी और मजबूर थी। तभी उस टीटी ने एक /अनैतिक प्रस्ताव/ रखा। उसने कहा कि अगर वह उसे "खुश" कर दे और उसके साथ कुछ /निजी समय/ बिताए, तो वह उसे छोड़ देगा। गीता ने पहले विरोध किया, लेकिन पुलिस और बदनामी के डर से वह /समझौते/ के लिए तैयार हो गई।

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दो सगे बेटों ने अपने पिता के साथ कर दिया बड़ा कां #ड/असली वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/लोन की किस्त और गिरता जमीर: अलवर...
16/04/2026

दो सगे बेटों ने अपने पिता के साथ कर दिया बड़ा कां #ड/असली वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
लोन की किस्त और गिरता जमीर: अलवर की एक दर्दनाक दास्तां

राजस्थान का अलवर जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी जिले के कठूमर गांव से एक ऐसी घटना सामने आई जिसने रिश्तों की पवित्रता और इंसानियत को शर्मसार कर दिया। यह कहानी है भूपेश कुमार की, जिसने गरीबी और कर्ज के दलदल से निकलने के लिए अपने जमीर का सौदा कर लिया और अंततः अपने ही बेटों के हाथों अपनी जान गंवा बैठा।

१. खुशहाल परिवार से तंगहाली का सफर

भूपेश कुमार अलवर के कठूमर गांव में रहता था और ऑटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी खुशी देवी और दो बेटे, कृष्ण (१०वीं कक्षा) और बल्लू (८वीं कक्षा) थे। भूपेश की मेहनत से घर का गुजारा ठीक-ठाक चल रहा था।

लेकिन एक सुबह उसकी ऑटो रिक्शा दुर्घटनाग्रस्त हो गई। रिक्शा पूरी तरह टूट गई, हालांकि भूपेश बाल-बाल बच गया। इस हादसे ने उसके मन में डर बिठा दिया और उसने ऑटो चलाना छोड़ दिया। इसके बाद उसने एक कारखाने में मजदूरी शुरू की, लेकिन वहां की कमाई से घर की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं।

२. दुकान का सपना और /विवादास्पद/ मार्ग

बच्चों की स्कूल फीस और फटे हुए कपड़ों ने भूपेश को व्याकुल कर दिया। उसने गांव में कपड़े की दुकान खोलने का फैसला किया और बैंक से ४ लाख रुपये का लोन लिया। दुकान अच्छी चलने लगी, लेकिन सफलता के साथ भूपेश के कदम भटकने लगे। वह /नशीले पदार्थों/ का सेवन करने लगा और उसका चरित्र बिगड़ने लगा।

रजनी देवी से मुलाकात

४ फरवरी २०२६ को रजनी देवी नामक एक महिला उसकी दुकान पर आई। भूपेश की नीयत रजनी को देखकर डगमगा गई। रजनी ने ५००० रुपये के कपड़े खरीदे लेकिन पैसे न होने का बहाना बनाया। उसने भूपेश को रात में अपने घर बुलाया। उस रात भूपेश ने रजनी के साथ /अनैतिक संबंध/ स्थापित किए। यहाँ से भूपेश की नैतिकता का पतन शुरू हुआ।

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Police के रवैये से दुखी पीड़िता ने जान दे दी |न्याय की प्रतीक्षा और सामाजिक विडंबना: दो घटनाओं का विश्लेषणभारत में जहां ...
16/04/2026

Police के रवैये से दुखी पीड़िता ने जान दे दी |
न्याय की प्रतीक्षा और सामाजिक विडंबना: दो घटनाओं का विश्लेषण

भारत में जहां एक ओर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर समानता और न्याय के नारे गूंज रहे थे, वहीं उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों से ऐसी खबरें सामने आईं जिन्होंने समाज के अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया। एक ओर चित्रकूट में एक दलित बेटी ने न्याय न मिलने के कारण अपनी /जीवन लीला/ समाप्त कर ली, तो दूसरी ओर कासगंज में शोभा यात्रा के दौरान भारी बवाल हुआ।

१. चित्रकूट: न्याय की आस में बुझा एक दीपक

चित्रकूट जिले में एक १७ वर्षीय दलित किशोरी के साथ हुई /अमानवीय घटना/ ने सबको झकझोर कर रख दिया। यह मामला होली के दिन शुरू हुआ था, जब वह किशोरी घर से पानी भरने के लिए बाहर निकली थी।

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Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले के कितने बच्चे थे,बेटा बहू क्या करते है |Kids Details,Son,Daughter..आशा भोसले: सुरों की म...
16/04/2026

Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले के कितने बच्चे थे,बेटा बहू क्या करते है |Kids Details,Son,Daughter..

आशा भोसले: सुरों की मलिका का जीवन संघर्ष और परिवार

भारतीय संगीत जगत की वह आवाज़, जिसने सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज किया—श्रीमती आशा भोसले। आज जब वह हमारे बीच नहीं रहीं, तो पूरा देश शोक में डूबा है। लेकिन उनकी सुरीली आवाज़ के पीछे एक ऐसी औरत की कहानी छिपी है, जिसने अपनी निजी जिंदगी में अपार दुख, अपमान और संघर्ष झेला।

१. बचपन और संगीत का सफर

आशा भोसले का जन्म १५ सितंबर १९३३ को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे। घर में संगीत की सरिता बहती थी, लेकिन यह सुखद समय लंबा नहीं चला। आशा जी बहुत छोटी थीं जब उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया।

पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति चरमरा गई। अपने परिवार और भाई-बहनों का पेट भरने के लिए नन्हीं आशा और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने छोटी उम्र में ही अभिनय और गायन शुरू कर दिया। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में ये दोनों बहनें स्टूडियो के चक्कर लगा रही थीं।

२. एक /विवादित/ फैसला और वैवाहिक जीवन का दर्द

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सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational storyअध्याय १: समाज का दबाव और चमन की चुप्पीमहाराष्ट्र के मु...
16/04/2026

सरकारी आफिसर कि खूबसूरत बीवी ने यह क्या किया | Motivational story

अध्याय १: समाज का दबाव और चमन की चुप्पी

महाराष्ट्र के मुंबई शहर में चमन नाम का एक व्यक्ति रहता था। चमन एक उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी था, जिसके पास रुतबा, पैसा और बंगला सब कुछ था। लेकिन जब उसकी उम्र ३५ साल हो गई और उसने शादी नहीं की, तो रिश्तेदारों ने कानाफूसी शुरू कर दी। कोई कहता कि उसे अच्छी लड़की नहीं मिल रही, तो कोई कहता कि शायद वह बहुत ज्यादा दहेज चाहता है।

लेकिन चमन के मन के भीतर एक ऐसा /अंधेरा/ था जिसे वह किसी को बता नहीं सकता था। वह जानता था कि वह एक पूर्ण पुरुष के रूप में /अक्षम/ है। अंततः माता-पिता के दबाव में आकर उसने २५ साल की बीए शिक्षित लड़की, रीना से शादी कर ली। यह एक अरेंज मैरिज थी, क्योंकि चमन को डर था कि लव मैरिज में उसकी /कमजोरी/ पहले ही पकड़ी जाएगी।

अध्याय २: सुहागरात और /अधूरा/ सच

शादी के बाद पहली रात रीना ने बड़े उत्साह के साथ अपने पति का स्वागत किया। वह नई नवेली दुल्हन थी और अपने जीवनसाथी से प्रेम और /शारीरिक/ निकटता चाहती थी। लेकिन एक हफ्ता बीत गया, चमन ने उसे छुआ तक नहीं। वह हमेशा काम का बहाना बनाता या फिर थक जाने की बात कहता।

एक रात जब रीना ने खुद पहल की और उसके करीब आने की कोशिश की, तो चमन पीछे हट गया। उसने झल्लाकर कहा, "तुम्हें बस यही /गंदी/ चीजें सूझती हैं? क्या तुम शादी से पहले भी ऐसी ही थी?" यह सुनकर रीना के आंसू निकल आए। वह समझ नहीं पा रही थी कि उसका पति उससे /दूरी/ क्यों बना रहा है।

अध्याय ३: स्विट्जरलैंड की यात्रा और /विफलता/

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पति ने नौकर को पांच लाख रूपए दे कर करवाया कां #ड/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/मर्यादा और /वंश/ की बलि: बीकानेर की एक दु...
15/04/2026

पति ने नौकर को पांच लाख रूपए दे कर करवाया कां #ड/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/

मर्यादा और /वंश/ की बलि: बीकानेर की एक दुखद दास्तां
अध्याय १: केसर देसर का सम्मान और एक सूना आंगन

राजस्थान के बीकानेर जिले में एक खुशहाल गांव है—केसर देसर। यहाँ नागेश कुमार नाम के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति रहते थे। नागेश के पास २६ एकड़ उपजाऊ जमीन, धन, और समाज में बहुत ऊंची इज्जत थी। उनका इकलौता बेटा तरुण मेहनती था और अपने पिता के साथ खेती-बाड़ी संभालता था।

तरुण की शादी ८ साल पहले संजना से हुई थी। लेकिन इस घर की सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि ८ साल बीत जाने के बाद भी तरुण और संजना के आंगन में किसी बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी थी। नागेश कुमार अक्सर तरुण को ताने मारते थे, "इतनी बड़ी जायदाद का क्या होगा? अगर कोई /वारिस/ नहीं हुआ, तो हमारी मर्यादा मिट्टी में मिल जाएगी।"

इन तानों ने तरुण और संजना के बीच कड़वाहट भर दी थी।

अध्याय २: /अक्षमता/ का कड़वा सच

५ जनवरी २०२६ की सुबह, तरुण अपने दोस्त शंकर के साथ खेत पर बैठा था। शंकर थोड़ा चंचल स्वभाव का था और उसे /पर-स्त्री/ मोह की आदत थी। बातचीत के दौरान तरुण ने अपना दर्द साझा किया। उसने बताया कि पिछले हफ्ते वह शहर के अस्पताल गया था जहाँ डॉक्टरों ने उसे बताया कि उसके अंदर एक बड़ी /शारीरिक कमी/ है और वह कभी पिता नहीं बन सकता।

तरुण ने रोते हुए कहा, "पिताजी मुझे /नामर्द/ कहते हैं, लेकिन मैं उन्हें सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूँ।"

उसी समय वहां कल्याणी नाम की एक विधवा महिला आई। कल्याणी का चरित्र गांव में चर्चा का विषय रहता था। उसने तरुण से पैसे मांगे, पर तरुण ने मना कर दिया। तभी शंकर ने कल्याणी को पैसे देने का वादा किया, लेकिन एक शर्त रखी कि उसे उसके साथ खेत में /एकांत/ समय बिताना होगा। कल्याणी मान गई और उन दोनों के बीच /अनैतिक/ संबंध कायम हुए।

अध्याय ३: एक अपमानजनक प्रहार

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खूबसूरत लड़की के पास टिकट नहीं थी तो TT अपने साथ ले गया और फिर हुआ कुछ ऐसा||प्रायश्चित की राह: एक टिकट और /अवांछित/ समझौ...
15/04/2026

खूबसूरत लड़की के पास टिकट नहीं थी तो TT अपने साथ ले गया और फिर हुआ कुछ ऐसा||

प्रायश्चित की राह: एक टिकट और /अवांछित/ समझौता
प्रस्तावना: एक साधारण यात्रा जो जीवन बदल गई

यह कहानी साल 2012 के आसपास की है, जब तकनीक आज जितनी विकसित नहीं थी और लोगों के पास साधारण कीपैड वाले फोन हुआ करते थे। लखनऊ की रहने वाली 23 वर्षीय प्रियंका अपने भाई-बहन से मिलने दिल्ली जा रही थी। उसे क्या पता था कि यह कुछ घंटों का सफर उसके जीवन पर एक ऐसा /दाग/ छोड़ जाएगा जिसे धोने में उसे वर्षों लग जाएंगे।

अध्याय १: लखनऊ स्टेशन और खोई हुई उम्मीद

प्रियंका ने अपनी यात्रा के लिए स्लीपर कोच का टिकट लिया था। लखनऊ स्टेशन पर काफी भीड़ थी। जैसे ही ट्रेन आई, यात्रियों में धक्का-मुक्की होने लगी। प्रियंका जैसे-तैसे कोच के अंदर तो घुस गई, लेकिन अपनी सीट पर बैठकर जब उसने अपना बैग चेक किया, तो उसके होश उड़ गए।

भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उसका पर्स और टिकट दोनों /चोरी/ कर लिए थे। प्रियंका के पास अब न तो पैसे थे और न ही यह साबित करने का कोई जरिया कि वह वैध यात्री है। उसे घबराहट होने लगी कि अगर टीटी आया तो वह क्या करेगी।

अध्याय २: रात का अंधेरा और टीटी सुधीर

रात के लगभग 11:00 बज रहे थे। ट्रेन के अधिकांश यात्री सो चुके थे। तभी वहां 26 साल का टीटी सुधीर आया। सुधीर ने देखा कि एक खूबसूरत लड़की अपनी सीट पर डरी-सहमी बैठी है। उसने प्रियंका से टिकट मांगा।

प्रियंका ने कांपते हुए पूरी सच्चाई बताई, "साहब, भीड़ में मेरा टिकट और पैसे /चोरी/ हो गए हैं।" सुधीर ने उसकी बात पर यकीन नहीं किया और कहा, "इस तरह के बहाने मैं रोज सुनता हूं। या तो जुर्माना भरो या अगले स्टेशन पर तुम्हें पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।"

प्रियंका और भी ज्यादा डर गई। रात का समय था और वह अकेली थी। उसने अपने घर वालों को फोन करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।

अध्याय ३: एक /घिनौना/ प्रस्ताव और मजबूरी

सुधीर ने प्रियंका की बेबसी देखी, लेकिन उसके मन में /खोट/ आ गया। उसने प्रियंका के कान में झुककर कहा, "एक तीसरा रास्ता भी है। अगर तुम मुझे खुश कर दो, तो मैं तुम्हें बिना टिकट जाने दूंगा और पुलिस से भी बचा लूंगा।"

प्रियंका के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह समझ गई कि सुधीर उसकी मजबूरी का /गलत/ फायदा उठाना चाहता है। उसने 10 मिनट तक बहुत सोचा। उसे लगा कि अगर वह पुलिस के चक्कर में पड़ी तो बदनामी होगी और घरवाले भी परेशान होंगे। इसी /विवशता/ में उसने सुधीर की शर्त मान ली।

अध्याय ४: ट्रेन की गूंज में दबी /चीख/

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करोड़पति बॉस की शर्मनाक शर्त 😱: नौकरी चाहिए तो एक रात बीवी बनो! | गरीब लड़की का ज़बरदस्त जवाबस्वाभिमान की जीत: सोनिया और...
15/04/2026

करोड़पति बॉस की शर्मनाक शर्त 😱: नौकरी चाहिए तो एक रात बीवी बनो! | गरीब लड़की का ज़बरदस्त जवाब

स्वाभिमान की जीत: सोनिया और /अश्लील/ शर्त का अंत
प्रस्तावना: लखनऊ की गलियों से एक उम्मीद की किरण

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जिसे नवाबों और तहजीब का शहर कहा जाता है, वहां की तंग गलियों में एक छोटी सी उम्मीद पल रही थी। यह कहानी है सोनिया की, जिसने गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। लेकिन एक दिन उसे एक ऐसी /घिनौनी/ स्थिति का सामना करना पड़ा जिसने उसके चरित्र की परीक्षा ली।

अध्याय १: संघर्ष और मजबूरियों का साया

सोनिया बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थी। उसके पिता ऑटो रिक्शा चलाते थे, लेकिन एक दुर्घटना में उनका पैर खराब हो गया और वे घर पर ही /लाचार/ होकर रहने लगे। घर की जिम्मेदारी सोनिया की मां शारदा देवी पर आ गई, जो दूसरों के घरों में बर्तन धोने और झाड़ू-पोछा करने का काम करती थीं।

सोनिया ने रात-रात भर जागकर पढ़ाई की और अपनी कॉलेज की डिग्री पूरी की। वह चाहती थी कि एक अच्छी नौकरी पाकर अपने माता-पिता के /दुखों/ को दूर कर सके। लेकिन जब भी वह इंटरव्यू देने जाती, तो लोग उसके कपड़ों या अनुभव की कमी का मजाक उड़ाकर उसे /रिजेक्ट/ कर देते।

अध्याय २: विज्ञापन और घमंडी विक्रम

एक दिन सोनिया की नजर अखबार के एक विज्ञापन पर पड़ी। लखनऊ की एक बहुत बड़ी कंपनी में भर्ती चल रही थी, जिसका मालिक विक्रम था। विक्रम के बारे में मशहूर था कि वह बहुत घमंडी और गुस्सैल है। सोनिया ने हिम्मत जुटाई और इंटरव्यू के लिए आवेदन कर दिया।

इंटरव्यू वाले दिन सोनिया के पास पहनने के लिए सूट-बूट नहीं थे। उसने अपना इकलौता नया सूट-सलवार पहना और फाइल लेकर कंपनी पहुंच गई।

वहां मौजूद अन्य लड़कियां, जो आधुनिक कपड़ों में थीं, सोनिया का मजाक उड़ाने लगीं। वे कह रही थीं कि यह कोई गांव की सभा नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट ऑफिस है। सोनिया को /अपमान/ महसूस हुआ, लेकिन वह चुप रही।

अध्याय ३: इंटरव्यू रूम की /शर्मनाक/ शर्त

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खेत में गेहूं काटने गई बहु के साथ ससुर ने कर दिया कां #ड/लोगों के होश उड़ गए/जोधपुर का /खूनी/ न्याय: मर्यादा की /हत्या/ ...
15/04/2026

खेत में गेहूं काटने गई बहु के साथ ससुर ने कर दिया कां #ड/लोगों के होश उड़ गए/

जोधपुर का /खूनी/ न्याय: मर्यादा की /हत्या/ और एक बहू का प्रतिशोध
प्रस्तावना: अंजनीसर गांव की खामोशी के पीछे का सच

राजस्थान की वीर धरा, जहाँ शौर्य और मर्यादा की मिसालें दी जाती हैं, वहीं जोधपुर जिले के अंजनीसर गांव से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया। यह कहानी है अमर सिंह, उसके बेटे करण सिंह और बहू गौरी की। यह कहानी बताती है कि जब रिश्तों में /वासना/ का जहर घुलता है, तो उसका अंत कितना /भयानक/ और /खूनी/ होता है।

अध्याय १: एक एकड़ जमीन और /भटके/ हुए रास्ते

अमर सिंह एक साधारण किसान था, जिसके पास मात्र एक एकड़ जमीन थी। घर चलाने के लिए वह पास के एक कारखाने में मजदूरी भी करता था। अमर सिंह की पत्नी का /देहांत/ हो चुका था। घर में उसका इकलौता बेटा करण सिंह और बहू गौरी रहते थे। लेकिन अमर सिंह का चरित्र /मैला/ था। वह अपनी /अतृप्त/ इच्छाओं को पूरा करने के लिए गांव की अन्य महिलाओं के साथ /अनैतिक/ संबंध रखता था।

उसका बेटा करण सिंह भी कुछ कम नहीं था। वह आलसी था और काम में मन नहीं लगाता था। ४ साल पहले उसकी शादी गौरी से हुई थी, लेकिन करण अपनी पत्नी को उसके रंग के कारण पसंद नहीं करता था। करण भी अपने पिता की तरह बाहरी औरतों में दिलचस्पी रखता था।

अध्याय २: खेत की झाड़ियों में /पाप/ का खेल

गांव में मधु नाम की एक विधवा महिला रहती थी, जिसका चरित्र संदिग्ध माना जाता था। १० फरवरी २०२६ को अमर सिंह ने खेत में मधु को बुलाया। मधु को अपने बच्चों की फीस भरने के लिए पैसों की जरूरत थी। अमर सिंह ने मौके का फायदा उठाया और ₹२००० के बदले मधु के साथ /शारीरिक/ संबंध बनाए।

विडंबना देखिए, कुछ दिनों बाद अमर सिंह का बेटा करण भी उसी मधु के साथ उसी खेत में /अश्लील/ काम करते पाया गया। बाप और बेटा, दोनों एक ही महिला के साथ /अवैध/ रिश्तों में डूबे हुए थे। लेकिन इसी दौरान एक हादसा हुआ—खेत में बिजली ठीक करते समय करण खंभे से गिर गया और उसकी रीढ़ की हड्डी /टूट/ गई। अब वह हमेशा के लिए बिस्तर पर आ गया था।

अध्याय ३: ससुर की /गंदी/ नजर और बहू की मजबूरी

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Asha Bhosle D/ea/th: कैसे हुआ आशा भोसले का निधन?, वजह जान हो जाएंगे हैरान!|SEE MORE: https://rb.celebshow247.com/q6jkप्र...
15/04/2026

Asha Bhosle D/ea/th: कैसे हुआ आशा भोसले का निधन?, वजह जान हो जाएंगे हैरान!|
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प्रस्तावना: १२ अप्रैल २०२६ - एक खामोश दोपहर

भारतीय संगीत जगत के इतिहास में १२ अप्रैल २०२६ का दिन काले अक्षरों में दर्ज हो गया है। आज सुरों की वह जादुई दुनिया, जिसने सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज किया, हमेशा के लिए खामोश हो गई। मुंबई का प्रतिष्ठित ब्रिज कैंडी अस्पताल आज उस /मातम/ का गवाह बना, जिसकी कल्पना किसी संगीत प्रेमी ने नहीं की थी। ९२ वर्ष की आयु में, सुरों की मलिका आशा भोसले ने अपनी अंतिम सांस ली।

मैनपुरी की इस महिला ने जो अपने सगे भाई के साथ की है उसे समाज कभी भूल नहीं पाएगा ||मैनपुरी का /खूनी/ विश्वासघात: पूजा दुब...
14/04/2026

मैनपुरी की इस महिला ने जो अपने सगे भाई के साथ की है उसे समाज कभी भूल नहीं पाएगा ||
मैनपुरी का /खूनी/ विश्वासघात: पूजा दुबे और मोहित की /दर्दनाक/ कहानी
प्रस्तावना: एक अटूट रिश्ते का /अंत/

दुनिया में भाई-बहन का रिश्ता सबसे पवित्र माना जाता है। बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के कुसमरा गांव में ७ अप्रैल २०२६ को एक ऐसी घटना घटी, जिसने इस पवित्र रिश्ते को /कलंकित/ कर दिया। एक बहन ने अपने /अवैध/ प्रेम संबंधों को छुपाने के लिए अपने ही भाई को /मौत/ के घाट उतरवा दिया।

अध्याय १: खुशहाल परिवार के पीछे का /कड़वा/ सच

मैनपुरी के किसनी थाना क्षेत्र के कुसमरा गांव में ३६ वर्षीय दिलीप दुबे का परिवार रहता था। दिलीप महाराष्ट्र के पुणे में एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में नौकरी करता था। घर में उसकी ३३ वर्षीय पत्नी पूजा दुबे और उनके तीन बच्चे रहते थे। दिलीप कड़ी मेहनत कर पैसे कमाता और घर भेजता था ताकि उसके बच्चे - रितिक (१० वर्ष) और अन्य दो छोटे बच्चे - एक अच्छा जीवन जी सकें।

लेकिन दिलीप को यह खबर नहीं थी कि उसकी अनुपस्थिति में पूजा ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। पिछले ५ सालों से पूजा का अपने पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र ठाकुर (३८ वर्ष) के साथ /अनैतिक/ संबंध चल रहा था। जितेंद्र खुद शादीशुदा था और उसके भी तीन बच्चे थे, लेकिन वह और पूजा एक-दूसरे के /मोह/ में अंधे हो चुके थे। जब भी दिलीप पुणे होता, जितेंद्र रात के अंधेरे में पूजा के घर आता था।

अध्याय २: वह काली रात - ७ अप्रैल २०२६

७ अप्रैल को पूजा अपने बच्चों के साथ अपने मायके (फर्रूखाबाद का करथिया गांव) से वापस अपने ससुराल कुसमरा आई थी। पूजा का छोटा भाई मोहित मिश्रा, जो अपनी बहन से बहुत प्यार करता था, उसे और बच्चों को छोड़ने के लिए खुद साथ आया था। शाम के ५ बज चुके थे, इसलिए मोहित ने तय किया कि वह उस रात अपनी बहन के घर ही रुकेगा और अगली सुबह घर लौट जाएगा।

लेकिन पूजा, जो कई दिनों से अपने प्रेमी जितेंद्र से नहीं मिली थी, /बेचैन/ थी। उसने सोचा कि मोहित बगल के कमरे में सो रहा है और उसे कुछ पता नहीं चलेगा। आधी रात को करीब १२ बजे, उसने जितेंद्र को इशारा किया। जितेंद्र हमेशा की तरह छत के रास्ते पूजा के कमरे में दाखिल हुआ।

अध्याय ३: जब भाई ने देख ली /शर्मनाक/ हकीकत

देर रात करीब १ बजे, बगल के कमरे में सो रहे मोहित की आंख अचानक खुल गई। उसे अपनी बहन के कमरे से कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी। उसे लगा कि शायद कोई चोर घुस आया है। सच्चाई जानने के लिए मोहित दबे पांव पूजा के कमरे की ओर गया।

जैसे ही उसने दरवाजा खोला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी सगी बहन पूजा अपने पड़ोसी जितेंद्र के साथ /आपत्तिजनक/ और /अश्लील/ स्थिति में थी। मोहित का खून खौल उठा। उसने आव देखा न ताव और जितेंद्र पर हमला कर दिया। दोनों के बीच जमकर /हाथापाई/ शुरू हो गई।

शोर सुनकर पूजा का १० साल का बेटा रितिक भी जाग गया और वह दरवाजे की ओट से यह सब /खौफनाक/ मंजर देखने लगा।

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