31/03/2016
हमे दुःख लगता है जब :
1) कोई राजपूत लड़की या लड़का अपनी क्षत्रिय धर्म से बाहर विवाह करते है
2) जब माँ बाप के मन्नतों द्वारा मांगे और खून पसीने की कमाई से पाले पोसे पुत्र, नशे को अपनाकर अपने बुड्ढे माता पिता के सपने मिट्टी में मिलाते है।
3) जब कोई शराब के पीछे लग कर अपने घर की सारी जायदाद को उजाड़ देता है। और अपने बच्चों को भी रुलने के लिए छोड़ कर मर जाता है।
4) जब कोई पढ़ा लिखा और अच्छे घर का भाई पड़ोसी के बच्चे को सही मार्ग नहीं दिखाता और कहता है मुझे क्या लेना, या फिर ये कहता है कि कोई नहीं सुनता
5) जब बच्चे नकल से पास होकर अपने लिए नोकरी तलाश करते हैं और ना मिलने पर सरकार का दोष निकालते हैं।
6) जब माँ बाप बच्चों को राजपूत सभाओं में जाने से ये केह कर रोकते है की तुझे क्या मिलेगा वहा जाकर, ये वेहलों के काम है।
7) जब कोई लड़की, कोई कमजोर, कोई बजुर्ग, या गाय खतरे में होती है और क्षत्रिय कायरता पूर्वक देखता रहता है और उसकी रक्षा के लिए पहल नहीं करता
8) कोई राजपूत अकारण ही दूसरे राजपूत से झगड़ता है। और एक दूसरे को समय समय पर नुक्सान पहुंचाता है। और झूठेअहंकार में जीने लगता है।
9) जब माँ बाप अपने बच्चों को अपनी कौम के संस्कारों से और इसके महान विरसे से अवगत नहीं कराते। उनमे शूरवीरता, संस्कार और बहादुरी नही जगाते।
10) जब लोग आँख बन्द करके राजनितिक पार्टियों की खुशामद करते हुए अच्छे और समझदार लोगो को नजरअंदाज कर देते हैं और देश की बागडोर गलत हाथों में सौंप कर खुश होते हैं की हमारी पार्टी जीत गई। जबकि कौम और समाज का नुक्सान है।
जागो भाइयो। मुहँ मत फेरो।आँखे बन्द मत करो।
राजपूत एकता राजपूत चेतना एक प्र्यास है।
जो आप किसी वजह से नहीं कर पाये उसे हमें करने दो।
हमारा साथ दो।
सभाओं में आओ।
🐚जय भवानी
जय राजपूताना🐅