20/04/2025
डॉ. विजय भटकर – भारत के सुपरकंप्यूटर के जनक
डॉ. विजय पांडुरंग भटकर भारतीय कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्हें भारत के पहले स्वदेशी सुपरकंप्यूटर PARAM के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। वे एक वैज्ञानिक, शिक्षा शास्त्री, और तकनीकी नवाचार के प्रेरणास्रोत हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. विजय भटकर का जन्म 11 अक्टूबर 1946 को महाराष्ट्र के अकोला जिले के मुरतेजापुर गाँव में हुआ था। बचपन से ही उनकी गणित और विज्ञान में गहरी रुचि थी। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर एम.टेक. की पढ़ाई आईआईटी दिल्ली से की। बाद में उन्होंने आईआईटी दिल्ली से ही पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
करियर और उपलब्धियाँ
भारत सरकार ने जब अमेरिका से सुपरकंप्यूटर आयात करने का प्रयास किया और उन्हें मना कर दिया गया, तब डॉ. भटकर ने यह प्रण लिया कि भारत को अपना खुद का सुपरकंप्यूटर विकसित करना चाहिए। उन्होंने C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing) की स्थापना की और वहाँ PARAM 8000 सुपरकंप्यूटर का निर्माण 1991 में किया गया। यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।
प्रमुख योगदान:
PARAM 8000 के विकास में नेतृत्व
C-DAC की स्थापना
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में सक्रिय भूमिका
शिक्षा और विज्ञान में अनेक संस्थानों की स्थापना में योगदान
सम्मान और पुरस्कार:
पद्म श्री (2000)
पद्म भूषण (2015)
महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार
अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सम्मानों से सम्मानित
निष्कर्ष
डॉ. विजय भटकर एक सच्चे प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं जिन्होंने भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे आज भी युवाओं को नवाचार और विज्ञान की ओर प्रेरित कर रहे हैं।