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21/01/2024

सरदार भगतसिंह पर अद्भुत कविता।

पहले मिट्टी का कर्ज चुकाना था - चरण जीत चरण

जी के देखा है मर के देखेंगे रास आता नहीं सिमटना जबये तमाशा भी कर के देखेंगेसोचते हैं बिखर के देखेंगे नवाज़ देवबंदी      ...
14/05/2023

जी के देखा है मर के देखेंगे
रास आता नहीं सिमटना जब
ये तमाशा भी कर के देखेंगे
सोचते हैं बिखर के देखेंगे

नवाज़ देवबंदी

तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ हैमेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त आँखों को स...
14/05/2023

तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है
मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त आँखों को सिर्फ़ आप के ख़्वाबों का शौक़ है

चराग़ शर्मा

बहुत कुछ भी नहीं काफ़ी यहाँ अ बहुत थोड़े से चल जाता था पहले ये दीवारें तो हैं इस दौर का सच खुला हर दिल का दरवाज़ा था पहल...
14/05/2023

बहुत कुछ भी नहीं काफ़ी यहाँ अ बहुत थोड़े से चल जाता था पहले ये दीवारें तो हैं इस दौर का सच खुला हर दिल का दरवाज़ा था पहले

राजेश रेड्डी

जगह नहीं चाही है मैंने, कभी किसी के रूप भवन में।न मैंने उड़ना चाहा है, कभी किसी के निजी गगन में।मैं तो बस इतना चाहता हूँ...
13/05/2023

जगह नहीं चाही है मैंने, कभी किसी के रूप भवन में।
न मैंने उड़ना चाहा है, कभी किसी के निजी गगन में।
मैं तो बस इतना चाहता हूँ, मुझे समझ कर समिधा, मित्रो!
मन हो तो दे देना मेरी, कभी आहुति प्रेम हवन में।
- बनज कुमार 'बनज'

“मेरी ज़िंदगी इक दीवार है जिसका पलस्तर में नाख़ुनों सेखुरचता रहता हूँ। कभी चाहता हूँ कि इसकी तमाम ईंटें परागंदाकर दूं, कभ...
13/05/2023

“मेरी ज़िंदगी इक दीवार है जिसका पलस्तर में नाख़ुनों से
खुरचता रहता हूँ। कभी चाहता हूँ कि इसकी तमाम ईंटें परागंदा
कर दूं, कभी ये जी में आता है कि इस मलबे के ढेर पर
इक नई इमारत खड़ी कर दूं।”
- मंटो

न मेरा है न तेरा है ये हिन्दुस्तान सबका हैनहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका हैहज़ारों रास्ते खोजे गए उस तक पहुँचने केमग...
13/05/2023

न मेरा है न तेरा है ये हिन्दुस्तान सबका है
नहीं समझी गई ये बात तो नुकसान सबका है

हज़ारों रास्ते खोजे गए उस तक पहुँचने के
मगर पहुँचे हुए ये कह गए भगवान सबका है

जो इसमें मिल गईं नदियाँ वे दिखलाई नहीं देतीं
महासागर बनाने में मगर एहसान सबका है

अनेकों रंग, ख़ुशबू, नस्ल के फल-फूल पौधे हैं
मगर उपवन की इज्जत-आबरू ईमान सबका है

हक़ीक़त आदमी की और झटका एक धरती का
जो लावारिस पड़ी है धूल में सामान सबका है

ज़रा से प्यार को खुशियों की हर झोली तरसती है
मुकद्दर अपना-अपना है, मगर अरमान सबका है

उदय झूठी कहानी है सभी राजा और रानी की
जिसे हम वक़्त कहते हैं वही सुल्तान सबका है
- उदयप्रताप सिंह

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए ये ज़ख़्म ज़ख़्म मनाज़िर लहू लहू चेहरे कहाँ चल...
12/05/2023

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए

मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

ये ज़ख़्म ज़ख़्म मनाज़िर लहू लहू चेहरे

कहाँ चले गए वो लोग हँसते गाते हुए

- अज़हर इक़बाल

आदमी की आँख में घटती नमी पर सोचिये । आदमी में आदमीयत की कमी पर सोचिये । आदमी ही जल गया गर मज़हबी बारूद में, कौन सा मज़हब...
12/05/2023

आदमी की आँख में घटती नमी पर सोचिये । आदमी में आदमीयत की कमी पर सोचिये । आदमी ही जल गया गर मज़हबी बारूद में, कौन सा मज़हब बचेगा इस ज़मीं पर सोचिये ।।
- राजीव राज़

मैं तो बस चेहरे पढ़ता हूं. खुद को चेहरों में मढ़ता हूँ।मैंने इस दुनियां में देखे, मस्ताये मतवाले चेहरे! शीस उठा चलने वाले...
12/05/2023

मैं तो बस चेहरे पढ़ता हूं. खुद को चेहरों में मढ़ता हूँ।
मैंने इस दुनियां में देखे, मस्ताये मतवाले चेहरे!
शीस उठा चलने वाले, उज्वल दिखते काले चेहरे !
इस चेहरे पर लगन जगी हैं, उस चेहरे पर जगा क्रोध है।
शान्त भाव से खोया खुद में, आत्मा में जागा विरोध है।
में और वो आगे बढ़ता हूँ. में तो बस चेहरे पढ़ता हूँ
-सत्यनारायण सत्तन

कभी देता है ये खुशियाँ कभी दिल तोड़ देता है, ये जीवन भी अनोखी सी कहानी जोड़ देता है, न कोसो इस कदर तुम मुश्किलों से हार ...
11/05/2023

कभी देता है ये खुशियाँ कभी दिल तोड़ देता है,
ये जीवन भी अनोखी सी कहानी जोड़ देता है,
न कोसो इस कदर तुम मुश्किलों से हार के इसको,
कि हर इक मोड़ पर सीखें बड़ी बेजोड़ देता है
- अंकिता सिंह

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