Poet's Welfare Association - PWA

Poet's Welfare Association - PWA PWA is an organization setuped by AMIT PANDEY to appreciate the poets and writers who have not suffi

परोपकारः परमार्थम् नीतिविद्यास्तथैव च।वयम् मानुष्य, मानुष्यम् समस्त धर्माय एव हि।।इसी महान भावना को साकार करने हेतु हमने...
25/01/2018

परोपकारः परमार्थम् नीतिविद्यास्तथैव च।
वयम् मानुष्य, मानुष्यम् समस्त धर्माय एव हि।।

इसी महान भावना को साकार करने हेतु हमने मानुष्य संगठन की स्थापना इस भाव से की है कि, हम मानवता की उपरोक्त परिभाषा को साकार कर सकें तथा मनुष्य नामक शब्दावली को वास्तव में चरितार्थ कर सकें...
तो आइये हम सभी इस पावन विचार के साथ मानवता के पथ पर कुछ पदचिन्ह अंकित करते हुए समाज में इस विचार का संचरण करें तथा सर्व सहयोग से समाज को उस ऊँचाई तक ले जायें जहाँ तक पहुँचने के लिये यह वाँछित है।
अभी हमारे साथ जुड़ने के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश का चयन करें...

Start working from today...
Maanushya established with the mission to create 500+ smiles this year, in terms of educational and cultural development for the poor and needy children.

As well as to make a chain of 1000+ active members/volunteers with a spirit to working for society. So be the evidence of this campaign.. join us now and show your interest to do something for society, join us now at
www.maanushya.org

खेलने का तो उसूल है......जिन्हें खेलने आता हो उन्हीं के साथ खेला जाय......फिर मेरे साथ खेल कर फायदा ही क्या.....हम तो बन...
20/04/2016

खेलने का तो उसूल है......
जिन्हें खेलने आता हो उन्हीं के साथ खेला जाय......
फिर मेरे साथ खेल कर फायदा ही क्या.....
हम तो बने ही हैं बस इश्क करने को, यह खेल है, !!! पहली दफ़ा सुना है......
सुना है आज फिर वो इश्क करने, घर से निकले हैं,
गली में इश्क की मदहोश करने आशिकों को फिर,
मैं इतना नासमझ हूँ, कौन यह कहता सुनो तुमसे,
तुम्हारे इश्क क़ी हर जा़म मैंने खुद बनाई है,
भले यह है जिया की इश्क के हर रास्ते पर तुम,
हर एक शक्ल-ए-इश्क तुमसे है यहाँ वाकिफ,
मगर हम हैं यहाँ पर आज भी मशगूल इसमें सुन,
कि कल को स्वयं तुम आकर हमें वह जा़म दे जाओ,
नहीं है अब हमारी सुनो तुमसे इश्क की ख्वाईश,
तुम्हें इस खेल में पर कोई राही पस्त ना कर दे,
इसी मैं सोच में पड़ कर तुम्हें हूँ देखता हर दम,
मगर सब आज कहते हैं, कहाँ मैं तुम्हें भूला हूँ,
नहीं कहता जमाना सच यहाँ हर बात कहता है,
तुम्हें जपता नहीं हर पल जमाना यह क्यूँ कहता है,
नहीं कहता जलन है आज मेरे दिल में तुझसे पर,
सुनो मैं अब भी कहता हूँ यहाँ है एक ही मंदिर,
वहाँ भी एक ही मूरत किसी की याद करती है,
यहाँ का परिव्राजक हूँ मैं, मैं जनता, मैं ही हूँ राही,
तुम्हीं हो स्वयं एक देवी, यही सृष्टी है अब मेरी.........
- अमित पाण्डेय (Ashutosh Pandey) ©
शेष मंच से.....

नमस्कार मित्रों,आज PWA से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए व्यक्तियो के लिये ६ मार्च बड़ा ही आवश्यक दिनांक है,का...
06/03/2016

नमस्कार मित्रों,
आज PWA से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए व्यक्तियो के लिये ६ मार्च बड़ा ही आवश्यक दिनांक है,
कारण है........
जन्मदिवस...........
जी हाँ, प्रभु की कृपा से आज मैं २० तथा मेरी महत्वाकांक्षी भारत पुर्नर्निमाण योजना PWA के ३ वर्ष पूरे हो चुके हैं |
तथा इस अवसर पर आप सबके स्नेहिल संदेश भी मिल रहे हैं, मैं सभी को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद तो नहीं कह पा रही परन्तु सदा ही आपके अकूत विश्वास का आभारी रहूँगा जिससे मुझे सदा कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती रहती है|
यद्यपि आज इस पत्र के माध्यम से मैं आप सभी के सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले जिज्ञासु प्रश्न का उत्तर देने का यथासम्भव प्रयास कर रहा हूँ, तथापि यदि कोई जिज्ञासा मन में हो तो निःसंकोच उसे मुझसे या सम्बन्धित व्यक्ति से पूछ सकते हैं हमें आपकी जिज्ञासायें शांत करने में अतिप्रसन्नता होगी,
प्रथम प्रश्न जो सदा ही पूछा जाता रहता है वह यह कि हम PWA के अस्तित्व की आधिकारिक घोषणा कब करेंगे ?
» हम इस अवसर की प्राप्ति हेतु हृदय से प्रतीक्षारत हैं परन्तु यदि ऐसा यूँ ही किया तो हम भी उन हजारों संस्थाओं की गिनती में आ खड़े होंगे जो कभी अपने चरमोत्कर्ष पर रह कर उत्थान के लिये कार्य करते- करते कहीं खो सी जाती हैं,
मैं PWA तथा इससे जुड़े लोगों को वह गुणवत्ता देना चाहता हूँ जो उन्हें सभी से उत्तम बनाये,
और इसिलिये हमने PWA को ३ देशों व भारत के सभी राज्यों में एक ही समय पर आधिकारिक अस्तित्व प्रदान करने की संकल्पना की है जो वास्तव में एक विश्व कीर्तीमान होगा और इसके साक्षी होंगे मैं तथा मेरा सहयोग करने वाले हजारों भारतवासी, जिसे वास्तव में साकार करने हेतु मैं सदा से प्रतिबद्ध हूँ |
यहाँ मैं स्वयं प्रश्नों का उत्तर देता रहा तो वास्तव में यह एक समयसाध्य कार्य होगा अतः उत्तम होगा कि आप स्वयं हमारे बारे में अपने प्रश्न रखें |
अंततः एक बार पुनः आप सभी के स्नेहिल संदेशों को हृदय से धन्यवाद |
आपके प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में,
आपका,

-अमित पाण्डेय
( संस्थापक व मुख्य कार्यपालक अधिकारी )
PWA - Poet's Welfare Association
संस्थापना वर्ष
६ मार्च २०१२

PWA
19/08/2015

PWA

CEO of PWA Amit Pandey - PWA की संस्थापना सन् २०१४ में वर्तमान मुख्य प्रशासक व संस्थापक श्री अमित पाण्डेय जी के द्वारा हिन्दी के गिरते स्तर व हिन्दी साहित्य के प्रति युवा कवियों के कम होते रूझान को खत्म करने के उद्देश्य से की गयी थी | श्री अमित पाण्डेय जी के विचार व दूरदर्शिता का ही प्रभाव है कि आज…

Is a great photographer inside you, tell us about yourself, share your talent to PWA We will promote you at the topest l...
10/07/2015

Is a great photographer inside you, tell us about yourself, share your talent to PWA
We will promote you at the topest level we can............
Try it

My first play written, Performing and directed by me GROUP OF INSTITUTIONS in AAGAAZ 2K 15 eventI am on the stage with m...
24/06/2015

My first play written, Performing and directed by me
GROUP OF INSTITUTIONS in AAGAAZ 2K 15 event
I am on the stage with my dedicated team members of
PWA.
And Credit of this plays goes to
Prakash Bisht
Abhishek Mishra
Alok Singh Rawat
Sanjay Kumar
Varun Tamrakar
Guddu Kumar
Pankaj Bharti
Abhijeet Kumar
Shashank Tripathi
And finally
Amit Pandey.
Once again thanks to all.

13/05/2015

View it

PWA the organization of Mr. Amit Pandey organised a play at IES GROUP OF INSTITUTIONS, BHOPAL in 8'th may this is the short sight of that play's practices ti...

03/04/2015
Like it to be a part of PWA dariyadili.
19/02/2015

Like it to be a part of PWA dariyadili.

This is a segment in which you come to know about the new way of welfarism it is established by Mr. AMIT PANDEY to motivate poets and artical writer.Just click it and be a part of it

31/01/2015

गोरखपुर के साहित्यिक जीवन का यह प्रभाव है कि वहाँ जाने के विचार मात्र से ही हृदय मे साहित्य की तरंग सी प्रवाहित होने लगती है, व वहाँ का अतुल्य वात्सल्य एक विचित्र सा भाव संचारित करता है , वहाँ की मिट्टी में एक बार फिर खेल लेने की......
एक बार बचपन फिर जी लेने की.............
जय श्री गोरक्षनाथ
- अमित पाण्डेय

सभी विश्ववाशियों को नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें नया वर्ष मंगलमय हो,Wish you a happy new year to my all the universer...
01/01/2015

सभी विश्ववाशियों को नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
नया वर्ष मंगलमय हो,
Wish you a happy new year to my all the universerits.

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House No. 463-G Andhiyari Bag North
Gorakhpur
273015

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Tuesday 7am - 5am
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