Shree Nandi Poojan Planner

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दैनिक भास्कर में छपा आज का अंक  #प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. प्रणव मिश्रा के साथ.  #ज्योतिष अमन वैद्य.
18/11/2021

दैनिक भास्कर में छपा आज का अंक

#प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ. प्रणव मिश्रा के साथ. #ज्योतिष अमन वैद्य.

दैनिक भास्कर में छपा ajj का अंक  #ज्योतिषाचार्य डाँ. प्रणव मिश्रा.. के साथ.. ज्योतिष अमन वैद्य
15/11/2021

दैनिक भास्कर में छपा ajj का अंक
#ज्योतिषाचार्य डाँ. प्रणव मिश्रा.. के साथ.. ज्योतिष अमन वैद्य

ज्योतिष ज्ञान....किसी जातक के विवाह में देरी हो रही है या अति शीघ्र विवाह चाहते हैं तो वह निम्न उपाय में से कोई उपाय कर ...
29/10/2021

ज्योतिष ज्ञान....किसी जातक के विवाह में देरी हो रही है या अति शीघ्र विवाह चाहते हैं तो वह निम्न उपाय में से कोई उपाय कर सकते हैं .....
1. शिवलिंग के ऊपर प्रतिदिन जल चढ़ा इत्र अर्पित करें
2 . सात हल्दी की गांठ एक पचरंगी धागे में बांध गणेश जी को चढ़ाएं
3. भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी अर्पित करें
4.गुरुवार के दिन दो पेड़े ले उन पर हल्दी लगाएं और किसी गाय को खिलाएं ऐसा आप साथ 7,11,21 गुरुवार कर सकते हैं
5. गाय को हर गुरुवार चने की दाल खिलाएं
6.11 दिन तक गणेश जी के मंत्र ओम गलोम॒ गणपताऐ नमः का जाप करें 11 माला प्रतिदिन तक यह सभी उपाय समान रूप से प्रभावशाली है आप किसी भी एक उपाय का प्रयोग कर सकते हैं....।।।।

ठाकुर गांव के मंडाटार स्थीत तारकेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक संपन्न करते हुए----!!!!
16/08/2021

ठाकुर गांव के मंडाटार स्थीत तारकेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक संपन्न करते हुए----!!!!

कल 13 अगस्त दिन शुक्रवार कल नागपंचमी हैं जिस भी जातक के कुंडली में काल सर्प दोष है.वे कल (सर्प देव वासुकी एवं भगवान शिव ...
12/08/2021

कल 13 अगस्त दिन शुक्रवार कल नागपंचमी हैं जिस भी जातक के कुंडली में काल सर्प दोष है.वे कल
(सर्प देव वासुकी एवं भगवान शिव का रुद्राभिषेक पूजन इत्यादि करें.या अपने प्रोहित से कराएं ऐसे करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलतीं हैं..!!!
शास्त्री अमन वैद्य
संपर्क सुत्र....7461043619

हर साल की भांति इस साल भी सावन के महीने में अपने घर पर  #भूतेश्वर महादेव जी का रुद्राभिषेक  कराते हुए....!!!!! जय भूतेश्...
10/08/2021

हर साल की भांति इस साल भी सावन के महीने में अपने घर पर #भूतेश्वर महादेव जी का रुद्राभिषेक कराते हुए....!!!!! जय भूतेश्वर महादेव....।।।।

25 जुलाई से इस बार शुरू होने जा रही है सावन जो 22 अगस्त तक रहेगा..।। पहली सोमवारी :- 26 जुलाई दूसरी सोमवारी :- 2अगस्त  त...
22/07/2021

25 जुलाई से इस बार शुरू होने जा रही है सावन जो 22 अगस्त तक रहेगा..।।
पहली सोमवारी :- 26 जुलाई
दूसरी सोमवारी :- 2अगस्त
तीसरी सोमवारी:- 9 अगस्त
चौथी सोमवारी:-16 अगस्त को
अतः जिन्हें भी रुद्राभिषेक सावन मे करना है हम लोगों से संपर्क कर सकते हैं..।।।

सभी प्रकार की मानसिक समस्याओं का निदान चंद्रमा से होता हैं, कयो की चन्द्रमा को ज्योतिष शास्त्र में मन का गति प्राप्त है ...
18/07/2021

सभी प्रकार की मानसिक समस्याओं का निदान चंद्रमा से होता हैं, कयो की चन्द्रमा को ज्योतिष शास्त्र में मन का गति प्राप्त है आप सभी जानते है कि..चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है।इस लिए मानसिक परेशानीयों से मुक्ति हेतु सोमवार व्रत रखें इस दिन शवेत वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर जल अर्पित करें. दूध मैं मिश्री मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें, सोमवार के दिन चावल चाँदी आदि का दान करे और गृह कलह मन की सांति हेतु शिवालय मैं नमः शिवाय मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जाप करें,.. यह उपाय करने से अवश्य ही सांति कि प्राप्ति होगी हर हर महादेव.....।।।✍️

काला धागा हाथ में बांधने से शरीर में मौजूदनकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है हजारों प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती हैं...
18/07/2021

काला धागा हाथ में बांधने से शरीर में मौजूदनकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है हजारों प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती हैं तो हनुमानजी के श्री चरणों में शनिवार के दिन काला धागा को चढ़ा कर अपने हाथ के कलाई मैं धारण करें तो अवश्य ही कार्य पूर्ण होती हैं.... जय श्री राम ओम हंग हनुमंते नमः

जाने आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ के लाभ,.।।।                                                                                ...
09/07/2021

जाने आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ के लाभ,.।।।

जय सूर्य देव....।।।।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार “आदित्य हृदय स्तोत्र” अगस्त्य ऋषि द्वारा भगवान् श्री राम को युद्ध में रावण पर विजय प्राप्ति हेतु दिया गया था. आदित्य हृदय स्तोत्र का नित्य पाठ जीवन के अनेक कष्टों का एकमात्र निवारण है. इसके नियमित पाठ से मानसिक कष्ट, हृदय रोग, तनाव, शत्रु कष्ट और असफलताओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है. इस स्तोत्र में सूर्य देव की निष्ठापूर्वक उपासना करते हुए उनसे विजयी मार्ग पर ले जाने का अनुरोध है. आदित्य हृदय स्तोत्र सभी प्रकार के पापों , कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति कराने वाला, सर्व कल्याणकारी, आयु, उर्जा और प्रतिष्ठा बढाने वाला अति मंगलकारी विजय स्तोत्र है.

विनियोग
ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो

भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः

पूर्व पिठिता

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌ । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌ ॥1॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌ । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌ । येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌ । जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌ ॥4॥

सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌ । चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌ ॥5॥

मूल -स्तोत्र
रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌ । पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌ ॥6॥


सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: । एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि: ॥7॥

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: । महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥8॥

पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: । वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥9॥

आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌ । सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥10॥

हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌ । तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌ ॥11॥

हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: । अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥12॥

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: । घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥13॥

आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:। कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥14॥

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: । तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते ॥15॥

नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: । ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥16॥

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: । नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥17॥

नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: । नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥18॥

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे । भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥19॥

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने । कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥20॥

तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे । नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥21॥

नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: । पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥22॥

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: । एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌ ॥23॥

देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च । यानि कृत्यानि ह सर्वेषु परमं प्रभु: ॥24॥

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च । कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥25॥

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌ । एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥26॥

अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि । एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌ ॥27॥

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा ॥ धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌ ॥28॥

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌ । त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌ ॥29॥

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌ । सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌ ॥30॥

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण: ।

निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥31॥

।।सम्पूर्ण ।।

*माता रानी के गुप्त  नवरात्रि**11 जुलाई  2021 से  19 जुलाई 2021* *गुप्त नवरात्रि में होगी 10 महाविद्याओं की साधना*======...
08/07/2021

*माता रानी के गुप्त नवरात्रि*
*11 जुलाई 2021 से 19 जुलाई 2021*

*गुप्त नवरात्रि में होगी 10 महाविद्याओं की साधना*
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✍🏻मां दुर्गा शक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्रि इस बार आषाढ़ मास में 11 जुलाई 2021 रविवार से शुरू हो रहे है आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही पुष्य नक्षत्र में नवरात्रि की शुरुआत होगी तथा सर्वार्थ सिद्धि योग में 19 जुलाई को गुप्त नवरात्रि की समाप्ति होगी, पौराणिक मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि के दौरान अन्य नवरात्रि की तरह ही पूजन करने का विधान है। इन दिनों भी 9 दिन के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिपदा यानी पहले दिन घटस्थापना करनी चाहिए, घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम मां दुर्गा जी की आराधना करनी चाहिए वर्ष में आदि शक्ति मां भगवती की उपासना के लिए चार नवरात्रि आती है, इसमें 2 गुप्त एवं 2 उदय नवरात्रि होती हैं। चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि उदय नवरात्रि के नाम से भी जानी जाती है। आषाढ़ और माघ की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है।
गुप्त नवरात्र के दौरान साधक इन दस महाविद्याओं के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।

जय माँ आदि शक्ति... इस वर्ष  #11 जुलाई 2021 रविवार आषाढ़ शुक्र प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है जो आषाढ़ श...
06/07/2021

जय माँ आदि शक्ति... इस वर्ष #11 जुलाई 2021 रविवार आषाढ़ शुक्र प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है जो आषाढ़ शुक्ल नवमी अर्थात 18 जुलाई 2021 रविवार तक रहेगा।.
अतः जिन्हें भी नवरात्र विशेष पूजन माँ दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहते हैं वे हमसे संपर्क कर सकते हैं...।।।

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