19/09/2017
काफिला शब्दों का सुहाना सफर" और "नीले अक्स"
मुझे फिर से छू कर दो
ख्वाबों की तामीर तुम सजन
डल झील पे जो मौन पसरा
आ अपने प्रेम के संगीत से
आज मिटा दें उसको
आ ये भटकाव भुला दें....
मेरा प्रथम काव्य संग्रह 'नीले अक्स' आप दोस्तों के दिलों पर दस्तक देने को बेताब है...
यह संग्रह भोपाल के लोकजंग प्रकाशन की कड़ी मेहनत से बना नायाब तोहफा है, जिसका संपादन सैफुद्दीन सैफ़ी जी ने किया है। भूमिका शब्दों के मसीहा केदारनाथ जी भाषा भाव निर्झरी और भोपाल के लेखन के जादूगर मुकेश दुबे Mukesh Dubey जी ने लिखी है।
कल नीले अक्स के संपादक, मेरे बड़े भैया सैफुद्दीन सैफ़ी जी, रंजीता सिंह जी और रजनी अग्रवाल जी की उपस्थिति में शब्दों के जादूगर 'शब्द मसीहा' केदार नाथ भैया ने दिल्ली के एन डी तिवारी भवन में नीले अक्स का अनौपचारिक लोकार्पण कर पहला पर्दा उठाया।
इसका औपचारिक लोकार्पण आगामी अक्टूबर दिल्ली में स्नेहिल पाठकों, फेसबुक मित्रों, परिवार के सदस्यों, मेरे छात्रों और साहित्यिक हस्तियों द्वारा "काफिला शब्दों का सुहाना सफर" के बैनर तले करने का निश्चय किया गया है। उससे पहले 'नीले अक्स' को आप मित्र जो कब से बेताब हैं, इसे पढ़ने के लिए प्री-बुकिंग करवा सकते हैं।
संग्रह हार्ड बाइंडिंग कवर में है और कीमत पेपरबैक से भी कम, यानि मात्र ₹200/-
आप संग्रह मंगवाने का अपना निर्णय मुझे इनबॉक्स या 8527822220 पर मेसेज या व्हाट्सएप्प करके सूचित करें। प्रीबुकिंग के लिए केदार नाथ शब्द मसीहा जी, सैफुदीन सैफ़ी जी, पवन अरोड़ा जी, मुकेश दुबे जी को भी संपर्क किया जा सकता है।
तो देर किस बात की.......
उठाइये फोन और भेजिए अपना पता...
साभार
आपकी
'नीलपरी'
(परी जो सिर्फ उड़ना चाहती है... पंख काट दो फिर भी उड़ान थमेगी नहीं....)
कल के पहले विमोचन की लाइव रिकॉर्डिंग यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं ⬇️
https://youtu.be/Lzp7J20Rrbg