16/08/2026
भगवान विष्णु का एक ऐसा मंदिर जहा प्रभु स्वयम् द्वारपाल के रूप में विराजित है .🙏
Triyuginarayan Dham uttarakhand..
भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से जब तीन पग में संसार को भी मांगा था तो प्रभु ने तिश्ररा पग राजा बलि के सर पे रख कर पाताल लोक पहुचा दिया ,राजा बलि के इस दान से प्रसन्न होके भगवान बामन ने वचन मांगने के लिए कहा ,तब राजा बलि ने उने अपने द्वारपाल के रूप में विराजित होने को कहा जो पाताल लोक की रखवाली करते है,और वही विराजमान होकर आज भी पाताल लोक की सुरक्षा करते है ..
इस मंदिर का नाम त्रियुगीनारायण क्यों पड़ा .👇
तीन युग से जल रही अखंड (धनंजय नमक अग्नि) त्रेतायुग से जल रही है .इस अग्नि कुंड में माता पार्वती और भोले बाबा ने साथ फेरे लिए.ओर भगवान वामन (विष्णु नारायण) का यह मंदिर इसीलिये मंदिर का नाम [ त्रियुगीनारायण पड़ा ]।।.
(शिव पार्वती विवाह) 👇
माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को विवाह हेतु प्रसन्न किया और भगवान शिव ने माता पार्वती के प्रस्ताव को स्वीकार किया। माना जाता है शिव-पार्वती का विवाह इसी मंदिर में सम्पन्न हुआ था। भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भ्राता होने का कर्तव्य निभाते हुए उनका विवाह संपन्न करवाया। ब्रह्मा जी इस विवाह में पुरोहित थे। इस मंदिर के सामने अग्निकुंड के ही फेरे लेकर शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। उस अग्निकुंड में आज भी लौ जलती रहती है। यह लौ शिव-पार्वती विवाह की प्रतीक मानी जाती है, इसलिए इस मंदिर को अखंड धूनी मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर के पास ही तीन कुण्ड भी है।
ब्रह्माकुण्ड:- इस कुण्ड में ब्रह्मा जी ने विवाह से पूर्व स्नान किया था व स्नान करने के पश्चात विवाह में प्रस्तुत हुए।
विष्णुकुण्ड:- विवाह से पूर्व विष्णु जी ने इस कुण्ड में स्नान किया था।
रुद्रकुण्ड:- विवाह में उपस्थित होने वाले सभी देवी-देवताओं ने इस कुण्ड में स्नान किया था।
इन सभी कुण्डों में जल का स्रोत सरस्वती कुण्ड को कहा गया है। सरस्वती कुण्ड का निर्माण विष्णु जी की नासिका से हुआ है। माना जाता है कि विवाह के समय भगवान शिव को एक गाय भी भेंट की गई थी, उस गाय को मंदिर में ही एक स्तम्भ पर बांधा गया .
और बाहर से लोग आकर triyuginarayan temple 🛕 मे शादी करते है।
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