22/11/2025
🌳 लालची व्यापारी और भरोसेमंद दोस्त 🤝
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में दो दोस्त रहते थे—राहुल और समीर। राहुल एक लालची और मतलबी व्यापारी था, जबकि समीर एक ईमानदार और भरोसेमंद किसान था।
एक बार, राहुल को व्यापार के लिए दूर शहर जाना पड़ा। उसके पास लोहे का एक बहुत बड़ा और कीमती धरन (Heavy Iron Beam) था, जिसे वह अपने साथ नहीं ले जा सकता था।
राहुल समीर के पास गया और बोला, "प्रिय मित्र समीर, मैं कुछ दिनों के लिए शहर जा रहा हूँ। क्या तुम मेरे इस भारी लोहे के धरन को अपने पास सुरक्षित रख सकते हो? यह मेरे पुरखों की निशानी है।"
समीर ने, जो स्वभाव से बहुत सीधा था, तुरंत हामी भर दी, "ज़रूर, राहुल! तुम निश्चिंत होकर जाओ। तुम्हारा सामान मेरे घर में बिल्कुल सुरक्षित रहेगा।"
राहुल खुशी-खुशी चला गया, लेकिन उसके मन में एक बुरा विचार था। वह जानता था कि धरन बहुत कीमती है और वह उसे समीर को वापस नहीं करना चाहता था। उसने सोचा, "यह सीधा-सादा किसान क्या कर लेगा? मैं कह दूँगा कि चूहे धरन को खा गए।"
कुछ महीनों बाद, राहुल वापस लौटा और समीर के घर गया।
"लाओ समीर, मेरा लोहे का धरन मुझे वापस कर दो," राहुल ने कहा।
समीर ने सिर झुका लिया और दुखी होकर बोला, "क्षमा करना मित्र, जब तुम गए थे, तो गाँव में चूहों का आतंक फैल गया था। उन्होंने तुम्हारे धरन को पूरी तरह से कुतर-कुतर कर खा लिया। अब वहाँ उसका एक टुकड़ा भी नहीं बचा।"
राहुल ने आश्चर्यचकित होने का नाटक किया और चिल्लाया, "क्या! भला लोहे को चूहे कैसे खा सकते हैं? तुम मुझसे झूठ बोल रहे हो!"
समीर ने शांत भाव से कहा, "राहुल, अगर तुम्हारे इतने कीमती धरन को चूहे खा सकते हैं, तो इसमें मेरा क्या कसूर? यह तो समय की बात है।"
राहुल मन ही मन हँसा। उसने सोचा, "धोखा देना तो सफल रहा। अब मैं एक और चाल चलता हूँ।"
"ठीक है, समीर," राहुल ने कहा। "मुझे तुम्हारे घर पर नहाना है। तुम ज़रा मेरे छोटे बेटे को नदी से पानी लाने के लिए भेज दो। मैं उसे अपने साथ ले जाता हूँ।"
समीर, जिसकी समझ में नहीं आया कि राहुल के मन में क्या चल रहा है, ने अपने प्यारे बेटे को राहुल के साथ भेज दिया।
जैसे ही राहुल को मौका मिला, उसने समीर के बेटे को एक अंधेरी गुफा में छिपा दिया और वापस समीर के पास आया।
"मेरा बेटा कहाँ है?" समीर ने पूछा।
राहुल ने उदास चेहरा बनाया और बोला, "समीर, बहुत ही दुखद घटना हो गई। जब हम नदी से लौट रहे थे, तो एक विशाल चील आई और तुम्हारे बेटे को पँजे में दबाकर ले गई!"
समीर यह सुनकर स्तब्ध रह गया।
"क्या? चील एक इतने बड़े बच्चे को कैसे ले जा सकती है?" समीर चिल्लाया।
तब समीर को राहुल के धरन वाली बात याद आई और उसे सारा खेल समझ में आ गया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "ज़रूर ले जा सकती है, मेरे दोस्त! यह वही समय है जब चूहे लोहे को खाते हैं, तो चील भी एक बच्चे को उठा सकती है।"
राहुल यह सुनकर काँप उठा। उसने समझ लिया कि उसका अपना ही धोखा अब उस पर उल्टा पड़ गया है।
डरकर राहुल ने सच कबूल किया और समीर से माफ़ी माँगी। उसने तुरंत समीर के बेटे को वापस लाकर दिया।
तब समीर ने कहा, "देखो राहुल, मैंने तुम्हें पहले माफ़ कर दिया था जब तुमने मेरे भरोसे को लोहे के धरन के बहाने धोखा दिया। लेकिन याद रखो, धोखा देने वाले हमेशा धोखा खाते हैं। तुमने सोचा कि तुम चालकी से बच जाओगे, पर तुम्हें अपना ही पासा पलटना पड़ा।"
राहुल ने अपनी गलती मान ली और भविष्य में कभी किसी को धोखा न देने की कसम खाई।
🤔 इस कहानी से यह सीख मिलती है:
जो दूसरों को धोखा देता है, छल करता है और झूठ बोलता है, उसे एक दिन अपने ही कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। धोखा और धोखा देने वाले भी एक दिन स्वयं धोखे का स्वाद चखते हैं।