Wedding planer

Wedding planer Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Wedding planer, Wedding planning service, भग्गल के मढ़ई, Chunar.

10/01/2026

06/01/2026

Wedding planners wo professionals hote hain jo ek shaadi ki planning se lekar uske ex*****on tak ki puri zimmedari uthate hain. Inka kaam dulha-dulhan aur unke parivaar ka stress kam karna hota hai taaki wo apni shaadi enjoy kar saken.
Yeh kaam jitna glamorous dikhta hai, asliyat mein isme bohot zyada mehnat aur pressure hota hai.
Wedding Planner Kya Karte Hain? (Role)
Ek wedding planner ka role sirf phool chunna nahi hota, wo niche di gayi cheezon ke liye zimmedar hote hain:
Budget Management: Shaadi ke budget ko track karna aur paison ka sahi istemal karwana.
Vendor Coordination: Caterers, decorators, photographers, makeup artists, aur DJs se baat karna aur unhe manage karna.
Venue Selection: Sahi jagah (Hotel, Resort ya Banquet) dhoondhna aur booking karwana.
Guest Management: Guests ki list, RSVP, unka rukne ka intezam (Logistics) aur transport dekhna.
Theme & Decor: Shaadi ka look aur feel design karna.
Isme Kitni Mehnat Hoti Hai?
Wedding planning ek high-stress aur physically demanding job hai. Isme mehnat ke kuch pehlu ye hain:
Long Working Hours: Shaadi ke season mein aapko din mein 15-18 ghante kaam karna pad sakta hai. Aapko sabse pehle venue par pahunchna hota hai aur sabse baad mein nikalna hota hai.
Pressure Handling: Agar last minute par baarish ho jaye ya caterer late ho jaye, toh planner ko hi bina panic kiye solution nikalna hota hai.
Physical Exhaustion: Kaafi bhag-daur hoti hai. Aapko site visits karni hoti hain aur shaadi wale din lagatar khade reh kar sab manage karna hota hai.
Communication Skills: Alag-alag tarah ke logon (laborers se lekar high-profile clients tak) se deal karne ke liye patience aur dimaag chahiye hota hai.
Attention to Detail: Ek chhoti si galti (jaise kisi guest ka pickup miss hona) poora experience kharab kar sakti hai, isliye har bariki par dhyan dena hota hai.

फोटोग्राफी शुरू करने से पहलेमेहनत बहुत करनी पड़ती है,दिल को साफ़ करना पड़ता हैऔर नजरों में खूबसूरती लानी पड़ती है.
08/12/2025

फोटोग्राफी शुरू करने से पहले
मेहनत बहुत करनी पड़ती है,
दिल को साफ़ करना पड़ता है
और नजरों में खूबसूरती लानी पड़ती है.

02/12/2025

wedding shoot only lawan

02/12/2025
एक समय की बात है, ठंड की शुरुआत में, एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ी अम्मा रहती थीं। उनका नाम राधा था। राधा अम्मा हमेशा अपन...
27/11/2025

एक समय की बात है, ठंड की शुरुआत में, एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ी अम्मा रहती थीं। उनका नाम राधा था। राधा अम्मा हमेशा अपने गर्म शॉल में लिपटी रहती थीं और उनके चेहरे पर मुस्कान रहती थी। गाँव के सभी बच्चे उनसे कहानियाँ सुनना पसंद करते थे।
इस साल, ठंड कुछ ज़्यादा ही जल्दी आ गई थी, और राधा अम्मा को अपने पुराने दिनों की याद सताने लगी। उन्हें याद आया कि कैसे उनकी दादी उन्हें सर्दियों में गरमा गरम चाय और पकौड़े खिलाती थीं। वह अपनी झोपड़ी में बैठी आग ताप रही थीं, जब उन्हें एक विचार आया।
उन्होंने सोचा कि क्यों न वह गाँव के बच्चों के लिए एक छोटी सी पार्टी रखें, जहाँ वह उन्हें गरमा गरम पकौड़े और चाय पिलाएँ। इस विचार से उनके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई।
अगले दिन, उन्होंने गाँव के बच्चों को इकट्ठा किया और उन्हें अपनी योजना बताई। बच्चे बहुत खुश हुए। राधा अम्मा ने अपनी थोड़ी-सी जमापूंजी से सामान खरीदा और बच्चों के साथ मिलकर पकौड़े बनाए।
शाम को, जब ठंड बढ़ गई थी, बच्चे राधा अम्मा की झोपड़ी में इकट्ठा हुए। आग जल रही थी, और गरमा गरम पकौड़ों की खुशबू पूरे झोपड़ी में फैल रही थी। राधा अम्मा ने सभी बच्चों को पकौड़े और चाय दी। बच्चे खुशी-खुशी खाते-पीते हुए कहानियाँ सुन रहे थे।
राधा अम्मा ने देखा कि बच्चे कितने खुश थे, और उन्हें लगा कि यह ठंड की शुरुआत सबसे अच्छी थी। उन्होंने सोचा कि खुशियाँ बाँटने से ही बढ़ती हैं।

27/11/2025

60 seconds · Clipped by Funny videos · Original video "जॉनी लीवर और कादर खान की लोटपोट करदेव वाली कॉमेडी.. | Johnny Lever & Kader Khan Best Lotpot " ...

🌳 लालची व्यापारी और भरोसेमंद दोस्त 🤝एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में दो दोस्त रहते थे—राहुल और समीर। राहुल एक लालची...
22/11/2025

🌳 लालची व्यापारी और भरोसेमंद दोस्त 🤝
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में दो दोस्त रहते थे—राहुल और समीर। राहुल एक लालची और मतलबी व्यापारी था, जबकि समीर एक ईमानदार और भरोसेमंद किसान था।
एक बार, राहुल को व्यापार के लिए दूर शहर जाना पड़ा। उसके पास लोहे का एक बहुत बड़ा और कीमती धरन (Heavy Iron Beam) था, जिसे वह अपने साथ नहीं ले जा सकता था।
राहुल समीर के पास गया और बोला, "प्रिय मित्र समीर, मैं कुछ दिनों के लिए शहर जा रहा हूँ। क्या तुम मेरे इस भारी लोहे के धरन को अपने पास सुरक्षित रख सकते हो? यह मेरे पुरखों की निशानी है।"
समीर ने, जो स्वभाव से बहुत सीधा था, तुरंत हामी भर दी, "ज़रूर, राहुल! तुम निश्चिंत होकर जाओ। तुम्हारा सामान मेरे घर में बिल्कुल सुरक्षित रहेगा।"
राहुल खुशी-खुशी चला गया, लेकिन उसके मन में एक बुरा विचार था। वह जानता था कि धरन बहुत कीमती है और वह उसे समीर को वापस नहीं करना चाहता था। उसने सोचा, "यह सीधा-सादा किसान क्या कर लेगा? मैं कह दूँगा कि चूहे धरन को खा गए।"
कुछ महीनों बाद, राहुल वापस लौटा और समीर के घर गया।
"लाओ समीर, मेरा लोहे का धरन मुझे वापस कर दो," राहुल ने कहा।
समीर ने सिर झुका लिया और दुखी होकर बोला, "क्षमा करना मित्र, जब तुम गए थे, तो गाँव में चूहों का आतंक फैल गया था। उन्होंने तुम्हारे धरन को पूरी तरह से कुतर-कुतर कर खा लिया। अब वहाँ उसका एक टुकड़ा भी नहीं बचा।"
राहुल ने आश्चर्यचकित होने का नाटक किया और चिल्लाया, "क्या! भला लोहे को चूहे कैसे खा सकते हैं? तुम मुझसे झूठ बोल रहे हो!"
समीर ने शांत भाव से कहा, "राहुल, अगर तुम्हारे इतने कीमती धरन को चूहे खा सकते हैं, तो इसमें मेरा क्या कसूर? यह तो समय की बात है।"
राहुल मन ही मन हँसा। उसने सोचा, "धोखा देना तो सफल रहा। अब मैं एक और चाल चलता हूँ।"
"ठीक है, समीर," राहुल ने कहा। "मुझे तुम्हारे घर पर नहाना है। तुम ज़रा मेरे छोटे बेटे को नदी से पानी लाने के लिए भेज दो। मैं उसे अपने साथ ले जाता हूँ।"
समीर, जिसकी समझ में नहीं आया कि राहुल के मन में क्या चल रहा है, ने अपने प्यारे बेटे को राहुल के साथ भेज दिया।
जैसे ही राहुल को मौका मिला, उसने समीर के बेटे को एक अंधेरी गुफा में छिपा दिया और वापस समीर के पास आया।
"मेरा बेटा कहाँ है?" समीर ने पूछा।
राहुल ने उदास चेहरा बनाया और बोला, "समीर, बहुत ही दुखद घटना हो गई। जब हम नदी से लौट रहे थे, तो एक विशाल चील आई और तुम्हारे बेटे को पँजे में दबाकर ले गई!"
समीर यह सुनकर स्तब्ध रह गया।
"क्या? चील एक इतने बड़े बच्चे को कैसे ले जा सकती है?" समीर चिल्लाया।
तब समीर को राहुल के धरन वाली बात याद आई और उसे सारा खेल समझ में आ गया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "ज़रूर ले जा सकती है, मेरे दोस्त! यह वही समय है जब चूहे लोहे को खाते हैं, तो चील भी एक बच्चे को उठा सकती है।"
राहुल यह सुनकर काँप उठा। उसने समझ लिया कि उसका अपना ही धोखा अब उस पर उल्टा पड़ गया है।
डरकर राहुल ने सच कबूल किया और समीर से माफ़ी माँगी। उसने तुरंत समीर के बेटे को वापस लाकर दिया।
तब समीर ने कहा, "देखो राहुल, मैंने तुम्हें पहले माफ़ कर दिया था जब तुमने मेरे भरोसे को लोहे के धरन के बहाने धोखा दिया। लेकिन याद रखो, धोखा देने वाले हमेशा धोखा खाते हैं। तुमने सोचा कि तुम चालकी से बच जाओगे, पर तुम्हें अपना ही पासा पलटना पड़ा।"
राहुल ने अपनी गलती मान ली और भविष्य में कभी किसी को धोखा न देने की कसम खाई।
🤔 इस कहानी से यह सीख मिलती है:
जो दूसरों को धोखा देता है, छल करता है और झूठ बोलता है, उसे एक दिन अपने ही कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। धोखा और धोखा देने वाले भी एक दिन स्वयं धोखे का स्वाद चखते हैं।

21/11/2025


आज, 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस (Universal Children's Day) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह दिन बच्चों के...
20/11/2025

आज, 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस (Universal Children's Day) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह दिन बच्चों के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। यह दिन बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है, और यह दुनिया भर के बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों, जैसे गरीबी, हिंसा, शिक्षा की कमी और भेदभाव पर ध्यान आकर्षित करता है।
​इस दिन की शुरुआत 1954 में हुई थी, और यह 1959 में बाल अधिकारों की घोषणा को अपनाने और 1989 में बाल अधिकारों पर कन्वेंशन को अपनाने की वर्षगांठ का प्रतीक भी है। ये दोनों दस्तावेज बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं।
​विश्व बाल दिवस पर, विभिन्न संगठन, सरकारें और व्यक्ति बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्यक्रम और गतिविधियाँ आयोजित करते हैं। यह एक ऐसा दिन है जब हम सभी को यह सोचने की जरूरत है कि हम अपने बच्चों के लिए एक उज्जवल भविष्य बनाने के लिए क्या कर सकते हैं।
​इस अवसर पर, बच्चों की खुशियों और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए, यहां एक तस्वीर है जो बच्चों के आनंद और उनके सपनों को दर्शाती है।

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन पुरुषों और लड़कों के सामने आने वाले मुद्दों पर प्रकाश...
19/11/2025

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन पुरुषों और लड़कों के सामने आने वाले मुद्दों पर प्रकाश डालने, पुरुषों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने और समाज में पुरुषों के सकारात्मक योगदान का जश्न मनाने के लिए समर्पित है।
​इस दिन, दुनिया भर में कई कार्यक्रम और गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें कार्यशालाएँ, सेमिनार और सार्वजनिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। यह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और एक अधिक समावेशी समाज बनाने का भी एक अवसर है।

कहानी: ‘नज़र’ का जादू​एक युवा फोटोग्राफर था, जिसका नाम आकाश था। वह हमेशा सर्वश्रेष्ठ कैमरा और सबसे महंगे लेंस के इंतज़ार ...
19/11/2025

कहानी: ‘नज़र’ का जादू
​एक युवा फोटोग्राफर था, जिसका नाम आकाश था। वह हमेशा सर्वश्रेष्ठ कैमरा और सबसे महंगे लेंस के इंतज़ार में रहता था ताकि वह 'परफेक्ट' तस्वीर ले सके।
​एक दिन, आकाश एक पार्क में बैठा था, उदास। उसे लगा जैसे उसकी तस्वीरें जानदार नहीं बन रही हैं। तभी, उसकी मुलाक़ात एक बूढ़े, अनुभवी फोटोग्राफर श्रीमान वर्मा से हुई, जिनके हाथों में एक पुराना, घिसा-पिटा कैमरा था।
​आकाश ने पूछा, "वर्मा जी, आपकी तस्वीरें इतनी बेहतरीन कैसे होती हैं? क्या आपका नया लेंस आया है?"
​वर्मा जी मुस्कुराए और बोले, "बेटा, 'नया लेंस' नहीं, मैंने अपनी 'नज़र' बदल ली है।"
​वर्मा जी ने आकाश को अपनी सबसे अच्छी तस्वीर दिखाई। वह एक टूटे हुए दरवाजे पर पड़ी रोशनी और छाया का साधारण-सा खेल था।
​उन्होंने समझाया:
​"सबसे अच्छा कैमरा वह नहीं है जो तुम्हारे पास हो, बल्कि वह है जिसके लेंस से तुम दुनिया को देखते हो।"
​"सिर्फ क्लिक मत करो, उस पल को महसूस करो। तुम्हारी तस्वीर तब कहानी बनती है, जब वह दर्शकों के दिल में एक भावना पैदा करती है।"
​"डरना मत। परफेक्ट शॉट हमेशा नहीं मिलेगा, लेकिन हर गलती तुम्हें कुछ नया सिखाएगी। रुकना नहीं!"
​आकाश को अपनी गलती समझ आ गई। उसने उसी पुराने कैमरे से, टूटे हुए दरवाजे के पास खेल रहे एक बच्चे की तस्वीर ली। उसने रोशनी को समझा, पल को महसूस किया।
​जब उसने वह तस्वीर ली, तो वह तस्वीर नहीं थी—वह बच्चे की हँसी, उसकी मासूमियत और उस शाम की उम्मीद थी।
​उस दिन के बाद, आकाश ने कभी अपने उपकरणों पर ध्यान नहीं दिया। उसने केवल अपनी नज़र और कला पर ध्यान दिया। और दुनिया ने उसे एक शानदार कहानीकार के रूप में पहचानना शुरू कर दिया, जिसके कैमरे से निकली हर तस्वीर एक अमर कहानी कहती थी।
​सीख (Moral):
​फ़ोटोग्राफ़ी सिर्फ़ कैमरे की नहीं, बल्कि आपकी 'नज़र' और 'कहानी' कहने की कला है।
​क्या आप चाहते हैं कि मैं इस कहानी को और विस्तृत करूँ, या फोटोग्राफी के किसी और पहलू पर एक छोटी कहानी लिखूँ?

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