07/06/2016
" हुँ भूख मरुँ, हुँ प्यास मरु, मेवाड़ धरा आजाद रहे,
हुँ घोर उजाला में भटकूं, पण मन में माँ री याद रहे "
"मु लड्यो घणो हूँ, सह्यो घणो हूँ, मेवाडी मान बचावण ने
मैं पाछ नहीं राखि रण में, बेरया रो खून बहावण ने "
प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयन्ती की 476 वीं जयन्ती पर उन्हे शत् शत् नमन व वन्दन ॥