02/03/2026
होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन दैवी कृपा से प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि अंततः सत्य और भक्ति की विजय होती है और अहंकार व अधर्म का विनाश निश्चित है।