07/04/2025
. //समाचार//
*ओपन शतरंज चैंपियनशिप में ग्वालियर के रूपेश कांत ने प्रथम, सीहोर के अनन्त जोशी ने द्वितीय और शुभम विश्वकर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया*
*शीर्ष पर पहुंचने के लिए कम से कम दस हजार घंटे की ईमानदार मेहनत जरूरी – पुलिस अधीक्षक श्री शुक्ला*
सीहोर 6 अप्रैल 2025
सीहोर जिला शतरंज संघ द्वारा स्व. श्रीमती रेखा तोमर की स्मृति में आयोजित ओपन शतरंज प्रतियोगिता में ग्वालियर, उज्जैन, नरसिंहगढ़ तथा सीहोर जिले के खिलाड़ियों ने भागीदारी कर शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक सीहोर श्री दीपक कुमार शुक्ला ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं समक्ष में दीप प्रज्वलित कर तथा चैस खेलकर शुभारंभ किया।
पुलिस अधीक्षक श्री शुक्ला ने अपने प्रभावी संबोधन में ओपन शतरंज प्रतियोगिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यहां बच्चों को एक ऐसा मंच मिल रहा है जहाँ वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर कुछ सीख भी सकें। आमतौर पर हम लोग क्रिकेट तक ही सीमित रह जाते हैं। अधिकांश बच्चों को क्रिकेट टूर्नामेंट्स में भाग लेने का मौका मिलता है, लेकिन शतरंज के लिए ऐसे अवसर बहुत कम ही होते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि इतने सारे बच्चे चेस खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत शतरंज की महाशक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है। हमें गर्व है कि विश्व प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद, आर. प्रज्ञानानंद, डी. गुकेश जैसे खिलाड़ी भारत से हैं। इससे सिद्ध होता है कि हमारे देश में मानसिक प्रतिभा की कमी नहीं है। ज़रूरत सिर्फ उसे पहचानने और निखारने की है। यदि बौद्धिक क्षमताओं की बात की जाए तो चाहे वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हो या क्वांटम टेक्नोलॉजी की बात हो अथवा स्पेस रिसर्च की, तो बौद्धिक रूप से हम बहुत सक्षम हैं। दुनिया में जितनी भी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियाँ हैं उनमें से अधिकांश का संचालन भारतीय ही कर रहे हैं। उनमें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई भारत में ही की थी और फिर विदेश जाकर उन्होंने सफलता प्राप्त की। शतरंज के क्षेत्र में पहले हमें विश्वनाथन आनंद जैसे खिलाड़ी मिले। लेकिन अब हर साल दो-तीन नए सितारे उभर रहे हैं। मतलब यह है कि जहाँ दिमाग, रणनीति, एनालिसिस और एक्ज़ीक्यूशन की बात होती है वहाँ हम बहुत आगे हैं।
लेकिन ज़रूरी यह है कि हम अपनी ताकत को पहचानें। हर किसी के पास सभी गुण नहीं होते। सबको अपनी-अपनी ताकत पहचान कर उस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने खिलाड़ी बच्चों से कहा कि अपनी क्षमता को पहचानिए, उसे निखारिए और आगे बढ़ाइए।
श्री शुक्ला ने खिलाड़ियों से स्टेट एवं नेशनल चैम्पियनशिप में खेलने संबंधी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने खिलाड़ी बच्चों को कड़े परिश्रम के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खेल हो या कोई रचनात्मक क्षेत्र, शीर्ष पर पहुंचना है तो उसी अनुपात में कम से कम दस हजार घंटे की ईमानदार मेहनत करना होगी। उन्होंने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं।
प्रतियोगिता के प्रारंभ में एसपी श्री शुक्ला का डॉ एस एस तोमर, सीहोर जिला शतरंज संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सिसौदिया, सचिव महेन्द्र व्यास, सदस्य एम एल दिलवारिया आदि ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप चौहान ने किया तथा अंत में संघ के सचिव महेंद्र व्यास ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बलराज सिंह सिसोदिया, रवींद्र यादव, सहित बच्चों के अभिभावक और काफी संख्या में शतरंज खिलाड़ी मौजूद थे।
*पुरस्कार वितरण*
प्रतियोगिता के समापन अवसर पर एडिशनल एसपी श्रीमती सुनीता रावत ने खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ी बच्चों से कहा कि नेगेटिविटी से हमेशा दूर रहकर यदि सकारात्मक सोच रखेंगे तो आपकी सफलता सुनिश्चित है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभ कामनाएं दी।
ओपन शतरंज प्रतियोगिता में कुल सात राउंड खेले गए, जिसमें प्रत्येक जीत पर 1 अंक और ड्रॉ (बराबरी) पर 0.5 अंक निर्धारित किए गए थे। टूर्नामेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों में से 10 खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
ग्वालियर के रुपेश कांत ने सबसे अधिक 6.5 अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। उनके बाद सीहोर के अनंत जोशी ने 6 अंकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि तीसरे स्थान पर रहे सीहोर के ही शुभम विश्वकर्मा, जिन्होंने 6 अंक अर्जित किए। आदित्य उपाध्याय (सीहोर) और सपन राठौर (नरसिंहगढ़) ने 5.5 अंक लेकर चौथे स्थान पर संयुक्त रूप से अपनी जगह बनाई। वहीं हिमांशु रावत (सीहोर), पुष्पराज सिंह उमठ (कुरावर), सुनील चौरसिया (सीहोर), चिराग मलवीय (रेहटी) और राजवीर यादव (रेहटी) ने 5-5 अंक अर्जित कर शीर्ष 10 में अपना नाम दर्ज कराया। प्रथम स्थान के लिए 7 हजार, द्वितीय स्थान 5 हजार तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को 3 हजार रुपए की सम्मान निधि, ट्राफी और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में 7 वर्ष से लेकर 73 वर्ष तक की उम्र के खिलाड़ियों ने भागीदारी की। निजाम खान और महेंद्र शर्मा ने आर्बिटर की भूमिका का निर्वहन किया। वेदांश उपाध्याय, अनिकेत राठौर, अंकित दांगी ने प्रतियोगिता में सक्रिय सहयोग किया।
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