05/07/2026
भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🌺
भारतीय लोककला जगत आज अपने सबसे प्रतिष्ठित स्वर-यात्राओं में से एक को अलविदा कह दिया। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई जी के अवसान ने भारतीय लोक परंपरा को एक अपूरणीय क्षति पहुँचाई है। पंडवानी जैसी अद्वितीय लोककला को उन्होंने अपनी साधना, अद्भुत वाचिक प्रतिभा और सशक्त अभिनय के माध्यम से विश्वभर में गौरवान्वित किया। उनका जीवन भारतीय लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण रहेगा।
माँ पद्म विभूषण शारदा सिन्हा और तीजन बाई जी का संबंध केवल दो महान कलाकारों का नहीं था, बल्कि लोकसंस्कृति के प्रति समान समर्पण और गहरे आत्मीय स्नेह का बंधन था।
जब भी किसी राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर दोनों का मिलन होता, औपचारिकताओं से पहले अपनापन सामने आ जाता। मुस्कुराहटों के बीच पानबट्टा खुलता, एक-दूसरे को अपने हाथों से पान खिलाया जाता, फिर आत्मीय आलिंगन... और उसके बाद दोनों अपनी-अपनी लोकपरंपरा की सुगंध लेकर मंच पर उतरतीं। उन क्षणों में ऐसा प्रतीत होता था मानो बिहार के लोकगीत और छत्तीसगढ़ की पंडवानी स्वयं एक-दूसरे का अभिनंदन कर रहे हों।
आज ये तस्वीरें केवल दो महान विभूतियों का साथ नहीं, बल्कि भारतीय लोककला की उस आत्मीय परंपरा का साक्ष्य हैं, जहाँ सम्मान, स्नेह और संस्कृति एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि तीजन बाई जी की पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। माँ शारदा के साथ उनकी यह आत्मीयता और लोककला के प्रति उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मृतियों में जीवित रहेगा।
विनम्र श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।
— शारदा सिन्हा परिवार
स्वर शारदा – शारदा सिन्हा आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन