27/09/2019
मानवता की खुली आँख के सबसे सुंदर सपने राम -----
कविता से इतर ,मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन पर एक शोध परक अदभुत कार्यक्रम अप्रवासी भारतीयों के बीच लंदन में दो दिन रस वर्षा...!!!
धन्यवाद Dr Kumar Vishwas और धन्यवाद सभी गुणी श्रोतागण🙏🙏❤❤
स्वान्तः सुखाय उद्देश्य से शुरू की गई यात्रा 'अपने-अपने राम' जब जयपुर से आगे लन्दन की तरफ निकली, तो मन आशंकित तो नहीं, लेकिन अधीर ज़रूर था कि पता नहीं क्या होगा, कैसे होगा। मेज़बान से मेरे सम्बन्ध व्यावसायिक न हो कर निजी थे, सो ज़्यादा सचेत होने की ज़रुरत थी। फिर सोचा "होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥" फिर जो हुआ, वो आनन्द था। इन दो शामों में न सिर्फ़ लन्दन के तमाम प्रमुख भारतीय चेहरे मौजूद थे, बल्कि स्कॉटलैंड, बेल्जियम, रूस, दुबई और थाईलैंड और भारत से इसी कार्यक्रम के लिए यात्रा कर के आए लोग उपस्थित हुए। श्रोता हँसे, रोए, साथ-साथ गाया, रस-रंग में सराबोर रहे और जाते-जाते जिस तरह से मिल कर गए, वह वर्णन के दायरे से बाहर है। कई बार ऐसा हुआ कि आधी चौपाई मैंने बोली और आधी चौपाई श्रोताओं में से किसी ने पूरी की। देश से बाहर रह कर भी देश के संस्कार-संस्कृति के साथ इस तरह से सम्बद्ध रहना प्रणम्य है। प्रश्न पूछने का अवसर मिलने पर ऐसे-ऐसे प्रश्न आए कि दूसरे दिन के सत्र से पहले दोबारा कई पन्ने पलटने पड़े। सीखने को भी मिला और बताने को भी। जाते-जाते सबने बताया कि सत्र के बाद उन्हें 'अपना' राम मिल गया है और आज वह अपने-अपने राम को अपने साथ ले कर जा रहे हैं। तो आपसे मिलते हैं, किसी ऐसे ही सत्र में 🙏❤️